बिहार में बाढ़ के हालात बद से बदतर हो चुके हैं। बाढ़ग्रस्त इलाकों में जिंदगी जीने से लेकर मुक्ति पाने तक के लिए जद्दोजहद जारी है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि लोगों को नेशनल हाइवे पर अपने परिजनों के शव जलाने पड़ रहे हैं। कई जगहों पर तो लकड़ी के अभाव में लोग शवों को नदी में प्रवाहित करने को मजबूर हैं।
सरकार ने वैसे शव प्रवाहित करने के मामले पर संज्ञान लिया है और जांच कराने की बात कही है। जानकारी के अनुसार दरभंगा जिले में जीवन रेखा बनी एनएच-57 न केवल लोगों का ठिकाना है, बल्कि शवों के लिए यह मुक्तिधाम भी बन चुका है। राजधानी नार्थ-ईस्ट कॉरिडोर का यह हिस्सा जो एनएच-57 पर स्थिति है किसी श्मशान से कम नहीं है।
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कई जगहों पर चिताओं को जलते यहां देखा जा सकता है। इधर, बुधवार को बाढ़ से प्रभावित अररिया जिले से एक तस्वीर वायरल हुई थी जिसमें एक शव को ट्रैक्टर पर सवार कुछ लोग उफनती नदी में फेंक रहे थे। तस्वीर वायरल हुई तो विभाग को इस पर सफाई देनी पड़ी।
बृहस्पतिवार को विभागीय प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि जिले के अधिकारियों से इस मामले में रिपोर्ट मांगी गई है। सचिव ने बताया कि बाढ़ में अब तक 98 लोगों की मौत की जानकारी है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति तक राहत पहुंचाने की कार्रवाई की जा रही है। राहत व बचाव कार्य में एनडीआरएफ की 27 टीमें काम कर रही हैं।