एईएस से प्रभावित बच्चे को अस्पताल ले जाते परिजन (फाइल फोटो)
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तय मानकों के अनुसार प्रति 30 हजार की आबादी पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होना चाहिए। करीब 51 लाख की आबादी वाले मुजफ्फरपुर में 170 पीएचसी होने चाहिए, जबकि यहां केवल 103 पीएचसी हैं और उनमें भी सरकार आधारभूत स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया नहीं करा पा रही है।
वहीं जिले के एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की हालत खस्ता है। साल 2017-18 के लिए यह एकमात्र सीएचसी भी मूल्यांकन के काबिल नहीं था। कारण कि यहां रेटिंग के लिए तय मानकों के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी।
तय मानकों के अनुसार, प्रति 1.20 लाख की आबादी पर एक सीएचसी होना चाहिए। यानि कि मुजफ्फरपुर जिले की आबादी के अनुसार यहां 43 सीएचसी जरुरी हैं, जबकि यहां एकमात्र सीएचसी है।
एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से हो रही बच्चों की मौतों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं की ऐसी बदहाल तस्वीर चिंता का विषय है। पिछले दो दशकों या उससे अधिक समय से हर साल मासूमों की मौत देखी जा रही है।