कस्टम टीम को ही जीआरपी ने लिया हिरासत में
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रक्सौल जंक्शन पर चाइनीज ई सिगरेट की खेप सत्याग्रह एक्सप्रेस से तस्करी होने वाली थी। सूचना पर रक्सौल स्थित कस्टम कार्यालय के सुप्रीटेंडेंट और अन्य तीन अधिकारियों ने रक्सौल जंक्शन पर जाकर उक्त सिगरेट के बंडल को बरामद कर लिया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 35 हजार रुपए के करीब है।
प्लेटफार्म पर उक्त छापेमारी की सूचना पर जीआरपी के थानाध्यक्ष पवन कुमार अन्य पुलिस बल के साथ वहां पंहुच गए और उल्टे कस्टम अधिकारियों के साथ विवाद करने लगे। मामला यहां तक ही नहीं थमा, बल्कि जीआरपी थानाध्यक्ष नें अपनी दबंगई दिखाते हुए कस्टम सुप्रीटेंडेंट को जीआरपी थाने ले जाकर बैठा दिया और उनको अभी तक डिटेन कर रखें हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि जीआरपी का इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी नें सुप्रीटेंडेंट रैंक के अधिकारी को कब्जे में कर रखा है। हालांकि तस्करी की वस्तुओं को रोकने और जब्त करने के लिए कस्टम के अधिकारी कहीं भी छापेमारी कर सकते हैं। इसके लिए उनको किसी से परमिशन की आवश्यकता नहीं है, लेकिन रक्सौल जंक्शन पर जीआरपी की इस दादागिरी से लोग हतप्रभ हैं। लोगों का कहना है कि तस्करी की वस्तुओं को जब्त करने में जीआरपी को सहयोग करना चाहिए।