पद्मश्री कपिल देव प्रसाद को कई सम्मान मिले।
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बावन बूटी कला के कारीगर।
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बूटी साड़ी को जल्द ही जीआई टैग मिल सकता है
वहीं नाबार्ड के सीजीएम विनय कुमार सिन्हा के अनुसार बावन बूटी साड़ी को जल्द ही जीआई टैग मिल सकता है। चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री में ऑफलाइन सुनवाई का इंतजार है। यह प्रमाणन इस कला को नया जीवन दे सकता है। एक समय में हजारों कारीगरों की आजीविका का स्रोत रही यह कला आज मात्र 80-100 कारीगरों तक सिमट गई है। सरकारी उदासीनता और बाजार की चुनौतियों के बीच यह प्राचीन कला संरक्षण की प्रतीक्षा कर रही है। क्या यह विलुप्त होती कला फिर से अपनी खोई हुई चमक पा सकेगी? यह समय ही बताएगा।
जानिए क्या होता जीआई टैग
जीआई
टैग का मतलब होता है जियोग्राफिकल इंडिकेशन यानी भौगोलिक संकेतक। इसका इस्तेमाल ऐसे उत्पादों के लिए किया जाता है, जिनका एक विशिष्ट भौगोलिक मूल क्षेत्र होता है। किसी प्रोडक्ट को ये खास भौगोलिक पहचान मिल जाने से उस प्रोडक्ट के उत्पादकों को उसकी अच्छी कीमत मिलती है। इसका फायदा ये भी है कि अन्य उत्पादक उस नाम का इस्तेमाल कर अपने सामान की मार्केटिंग भी नहीं कर सकते हैं।
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