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Bihar News: असम विमान हादसे में शहीद हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, आज गांव पहुंचेगा पार्थिव शरीर

Sun, 14 Jun 2026 04:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर जहानाबाद

सार

जहानाबाद के बनवरिया गांव के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार ने देश सेवा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। असम के जोरहाट वायुसेना स्टेशन पर हुए विमान हादसे में शहीद हुए युवा अधिकारी का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक गांव पहुंचेगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।
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शहीद शुभम कुमार की फाइल फोटो
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विस्तार
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बिहार के जहानाबाद के बनवरिया गांव का बेटा फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार शहीद हो गए। देश सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाने वाले इस युवा वायुसेना अधिकारी ने शादी से पहले राष्ट्र को प्राथमिकता दी और अंततः मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे दिया। असम विमान हादसे में शहीद हुए शुभम का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक गांव पहुंचेगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।
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रविवार शाम गांव पहुंचेगा पार्थिव शरीर
असम के जोरहाट वायुसेना स्टेशन पर हुए विमान हादसे में शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार का पार्थिव शरीर रविवार दोपहर एयरफोर्स के विशेष विमान से बिहटा एयरपोर्ट लाया जाएगा। इसके बाद सड़क मार्ग से शाम करीब चार बजे उनका शव जहानाबाद जिले के हुलासगंज प्रखंड स्थित पैतृक गांव बनवरिया पहुंचेगा। गांव में उनके अंतिम दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि देने पहुंचेंगे।

हाई स्कूल मैदान में दिया जाएगा गार्ड ऑफ ऑनर
बनवरिया हाई स्कूल मैदान में शहीद के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। यहां भारतीय वायुसेना और प्रशासन की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। करीब एक घंटे तक अंतिम दर्शन के बाद पार्थिव शरीर को गयाजी ले जाया जाएगा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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AN-32 विमान हादसे में गई थी जान
शनिवार को असम के जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस दर्दनाक हादसे में फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार समेत पांच वायुसेना कर्मियों की मौत हो गई थी। हादसे की खबर मिलते ही जहानाबाद समेत पूरे बिहार में शोक की लहर दौड़ गई।

किसान के बेटे ने मेहनत से तय किया सफलता का सफर
शुभम कुमार के पिता अमरेंद्र आनंद एक साधारण किसान हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों वाले परिवार में जन्मे शुभम ने कठिन परिश्रम और लगन के बल पर अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2021 में उनका चयन भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में हुआ था। अपनी कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट कार्यशैली के कारण उन्होंने कम समय में ही अधिकारियों और साथियों के बीच विशेष पहचान बना ली थी।

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देश सेवा के लिए शादी का प्रस्ताव भी ठुकराया
परिजनों के अनुसार घर में शुभम की शादी को लेकर चर्चा चल रही थी। परिवार चाहता था कि अब वह अपना घर-परिवार बसाएं, लेकिन शुभम ने साफ कह दिया था कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान करियर और देश सेवा पर है। उन्होंने विवाह के प्रस्ताव को यह कहकर टाल दिया था कि पहले देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभाना चाहते हैं।

मिलनसार स्वभाव ने सबका दिल जीता था
ग्रामीणों के मुताबिक शुभम बेहद सरल, विनम्र और मिलनसार स्वभाव के थे। छुट्टियों में गांव आने पर वह हर किसी से आत्मीयता के साथ मिलते थे। उनकी सफलता पर पूरा क्षेत्र गर्व करता था। आज वही गांव अपने होनहार बेटे को खोने के गम में डूबा हुआ है। हर गली, हर चौपाल और हर घर में सिर्फ शुभम की ही चर्चा हो रही है।
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नम आंखों से अंतिम विदाई की तैयारी
शहीद के घर पर लगातार जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों का पहुंचना जारी है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि ग्रामीण अपने वीर सपूत पर गर्व और उसकी असामयिक शहादत के दुख के बीच भावुक हैं। पूरा बनवरिया गांव अब उस पल का इंतजार कर रहा है, जब तिरंगे में लिपटा उसका बेटा अंतिम बार अपने घर लौटेगा और फिर हमेशा के लिए पंचतत्व में विलीन हो जाएगा।
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