कर्मकांड के लिए इन्होंने कोलकाता से ही एक नारियल को माता का स्वरूप बनाकर फूलों से सजी टोकरी में लेकर गयाजी धाम आए हैं। हर वेदी पर साथ लेकर चल रहे हैं। नारियल को श्रद्धालु ने काफी सुंदर ढंग से सजाया है।
पितृपक्ष के महापर्व में पिंदानियों की अलग-अलग आस्था देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में सोमवार को कूपगया वेदी पर कोलकाता से आए पिंडदानी विनोद अग्रवाल अपनी पत्नी सुनीता अग्रवाल के साथ 17 दिनों का त्रिपाक्षिक श्राद्ध कर रहे हैं। खासकर वह माता समेत 101 पीढ़ियों के उद्धार के लिए पिंडदान का कर्मकांड कर रहे हैं।
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कर्मकांड के लिए इन्होंने कोलकाता से ही एक नारियल को माता का स्वरुप बनाकर फूलों से सजी टोकरी में लेकर गयाजी धाम आए हैं। हर वेदी पर साथ लेकर चल रहे हैं। नारियल को श्रद्धालु ने काफी सुंदर ढंग से सजाया है। सिर पर मुकुट के साथ-साथ चेहरे का पूरा स्वरूप बनाया गया हैं।
नारियल को माता का स्वरुप दिया गया
पिंडदानी विनोद ने बताया कि श्राद्ध के लिए आने से पहले नारियल को माता का स्वरूप दिया गया है। इसके बाद उक्त नारियल को श्मशानघाट में जाकर परिक्रमा कर पितरों को निमंत्रण दिया गया कि वह उनके साथ गयाजी चले। उन्होंने बताया कि श्मशानघाट से सीधे गयाजी आए हैं। 17 दिनों तक अलग-अलग वेदी पर पिंडदान के कर्मकांड को पूरा करेंगे।
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गयाजी में करेंगे नारियल का विसर्जन
वहीं उन्होंने बताया कि माता के स्वरूप में लाए गए नारियल का विसर्जन गया के अक्षयवट वेदी पर करेंगे। यहां अपने तीर्थ-पुरोहितों से सुफल के साथ ही शय्या दान करेंगे। इसके अलगे दिन गायत्री घाट पर नाना-नानी का श्राद्ध कर आर्चाय को विदाई देंगे। उन्होंने बताया कि नारियल में उनके समस्त पितरों को आमंत्रित किया गया है। इस वजह से पूरी आस्था के साथ इसे कोलकाता से लेकर गयाजी धाम आए हैं।