गया नगर निगम की राजनीति में एक अहम बदलाव ने पूरे समीकरण को बदलकर रख दिया है। नगर विकास एवं आवास विभाग के नए फैसले के तहत अब स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों का चयन मेयर द्वारा मनोनयन के बजाय पार्षदों के चुनाव से किया जाएगा। इस निर्णय के बाद निगम के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है और पुराने समीकरण टूटते नजर आ रहे हैं।
अब अधिकार पार्षदों के पास
अब तक की व्यवस्था में मेयर अपने करीबी पार्षदों को स्टैंडिंग कमेटी में मनोनीत करते थे, जिससे उनका प्रभाव बना रहता था। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह अधिकार सीधे पार्षदों के पास चला गया है। इससे निगम की राजनीति में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि गुटबाजी और प्रतिस्पर्धा भी चरम पर पहुंचने की संभावना है। स्टैंडिंग कमेटी में कुल सात सीटें हैं, लेकिन इस बार दावेदारों की संख्या दोगुने से भी अधिक बताई जा रही है। ऐसे में मुकाबला काफी दिलचस्प और कड़ा होने वाला है। पार्षदों के बीच समर्थन जुटाने और जोड़-तोड़ की राजनीति भी तेज हो गई है। हर उम्मीदवार अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटा है।
बदलाव का असर पूर्व डिप्टी मेयर पर
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर पूर्व डिप्टी मेयर सह स्टैंडिंग कमेटी सदस्य अखौरी ओंकारनाथ श्रीवास्तव उर्फ मोहन श्रीवास्तव पर पड़ा है। माना जाता है कि उन्होंने मौजूदा मेयर को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और लंबे समय तक निगम की राजनीति में प्रभावशाली रहे। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब उन्हें भी चुनावी मैदान में उतरकर अपनी ताकत साबित करनी होगी।
चुनाव का आदेश जारी
इसी बीच गया जिला प्रशासन ने नगर निकाय चुनाव 2026 को लेकर विस्तृत आदेश जारी कर दिया है। समाहरणालय, गया द्वारा जारी निर्देश के अनुसार मतदान की तिथि 17 और 18 अप्रैल निर्धारित की गई है। नामांकन प्रक्रिया सुबह 8:00 बजे से 10:00 बजे तक चलेगी, जबकि मतदान सुबह 11:00 बजे से शुरू होकर निर्धारित समय तक जारी रहेगा। इसके बाद मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे और विजयी उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।
इन निकायों में होगा चुनाव
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नगर निगम गया, नगर परिषद बोधगया, शेरघाटी और टिकारी सहित विभिन्न निकायों में चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए अलग-अलग निर्वाचन पदाधिकारी और सहायक निर्वाचन पदाधिकारी नियुक्त किए गए हैं। सभी अधिकारियों को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन ने नगर आयुक्त, कार्यपालक पदाधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मतदान के दौरान आवश्यक संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करें। साथ ही चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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चुनाव करेगी नई दिशा तय
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव निगम की राजनीति में एक नई दिशा तय करेगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि सात सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में कौन बाजी मारता है और किसके राजनीतिक समीकरण मजबूत साबित होते हैं।