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Bihar : स्टेशन के पास ट्रैक पर गिरी पेड़ की टहनी, रेलकर्मी की मौत; तेज आंधी से गया जिले में बड़ा हादसा

Fri, 24 Jul 2026 12:39 PM IST
मगध ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया

सार

गया-कोडरमा रेलखंड पर शुक्रवार सुबह दर्दनाक हादसे में रेलवे के ग्रुप-डी कर्मचारी चंद्रिका यादव की मौत हो गई। ड्यूटी पर जाते समय टनकुप्पा स्टेशन के पास तेज आंधी-बारिश के दौरान पेड़ की भारी टहनी उनके ऊपर गिर गई, जिससे उनकी मौके पर ही जान चली गई। घटना के बाद परिवार और रेलकर्मियों में शोक का माहौल है।
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घटनास्थल पर पहुंचे रेलकर्मी - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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गया-कोडरमा रेलखंड पर शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में रेलवे के एक कर्मचारी की जान चली गई। ड्यूटी के लिए घर से निकले ग्रुप-डी कर्मचारी पर टनकुप्पा स्टेशन के समीप अचानक पेड़ की भारी टहनी गिर गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और साथी रेलकर्मियों में शोक की लहर दौड़ गई।
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ड्यूटी के लिए निकले थे
जानकारी के मुताबिक, मृतक की पहचान फतेहपुर थाना क्षेत्र के बाभनीमा गांव निवासी 56 वर्षीय चंद्रिका यादव के रूप में हुई है। वह रेलवे में ग्रुप-डी कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे वह अपने घर से ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए निकले थे। टनकुप्पा स्टेशन के समीप अप लाइन के पास पहुंचते ही तेज आंधी और बारिश के बीच एक बड़े पेड़ की टहनी टूटकर सीधे उनके ऊपर आ गिरी। गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

गांव में मचा कोहराम
हादसे की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद रेलकर्मी घटनास्थल पर पहुंच गए। वहीं, जैसे ही घटना की जानकारी बाभनीमा गांव पहुंची, परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजन तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हो गए। चंद्रिका यादव के असामयिक निधन से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में भी शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।
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पुलिस की कार्रवाई का इंतजार
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने रेलवे पुलिस और संबंधित अधिकारियों को सूचना दी। समाचार लिखे जाने तक पुलिस के मौके पर पहुंचने और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया चल रही थी। पुलिस की ओर से आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।

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पुराने पेड़ों की सुरक्षा पर उठे सवाल
यह हादसा एक बार फिर रेलवे ट्रैक और स्टेशनों के आसपास खड़े पुराने एवं जर्जर पेड़ों की नियमित निगरानी और समय-समय पर छंटाई की आवश्यकता को उजागर करता है। बरसात और तेज हवा के दौरान इस तरह की घटनाएं यात्रियों और रेलकर्मियों दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन से ट्रैक किनारे खड़े जोखिम वाले पेड़ों का सर्वे कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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