एक ही मकान में 947 मतदाता होने का आरोप
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बिहार की सियासत में गुरुवार को बड़ा हड़कंप मच गया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट करते हुए दावा किया कि गया जिले के बाराचट्टी विधानसभा क्षेत्र के निदानी गांव के मतदान केंद्र संख्या 161 में एक ही घर में 947 मतदाता दर्ज हैं। उन्होंने इसे चुनाव आयोग का जादू बताते हुए लिखा कि एक मकान में पूरा गांव बस गया है और सभी मतदाता फर्जी हैं। राहुल गांधी के इस ट्वीट के बाद गया जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया और डीएम शशांक शुभंकर ने देर रात ही मोहनपुर प्रखंड के बीडीओ को जांच का आदेश दे दिया।
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जांच में सामने आया सच
डीएम के आदेश पर की गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि सोशल मीडिया पर फैलाई गई जानकारी अफवाह है। निदानी गांव के मतदान केंद्र संख्या 161 के मकान संख्या 6 में 947 मतदाताओं का दावा पूरी तरह निराधार निकला। गांव के अजय कुमार ने बताया कि वे पिछले 30 वर्षों से यहां मतदान करते आ रहे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में मकानों पर नंबर अंकित ही नहीं होते। ऐसे में किसी एक मकान संख्या के तहत 947 मतदाता दर्ज होना संभव ही नहीं है। जांच में यह भी पाया गया कि गांव में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 1000 है, जिनमें से कुछ नए मतदाता भी जोड़े जाने वाले हैं। यानी 947 मतदाता पूरे गांव के मतदाताओं का ही हिस्सा हैं, न कि किसी एक मकान के।
कैसे फैली अफवाह?
ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ दिन पहले दिल्ली से एक निजी सर्वे टीम गांव में आई थी। इसी दौरान मकानों और मतदाताओं की संख्या से जुड़े आंकड़े जुटाए गए थे। तभी यह भ्रम पैदा हुआ कि मकान संख्या 6 में ही 947 मतदाता रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चूंकि गांव में मकानों पर नंबर नहीं होते, ऐसे में किसी एक मकान संख्या से पूरे गांव के मतदाताओं को जोड़ देना गुमराह करने वाली बात है।
निदानी गांव के लोगों का कहना है कि मतदान केंद्र संख्या 161 पर करीब 90 से 95 प्रतिशत मतदान भाजपा के पक्ष में होता है। वहीं, पास के मतदान केंद्र संख्या 162 पर महागठबंधन के पक्ष में अधिक वोट पड़ते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह अफवाह एक साजिश के तहत फैलाई गई ताकि यहां के मतदाताओं को फर्जी मतदाता बताकर उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा सके। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो ग्रामीणों की नागरिकता तक खतरे में पड़ सकती है।
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‘सोशल मीडिया पर फैल रही जानकारी गलत है’
डीएम शशांक शुभंकर ने कहा कि मामले की त्वरित जांच कराई गई है और सोशल मीडिया पर फैल रही जानकारी को पूरी तरह गलत पाया गया है। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि किसी भी वैध मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से नहीं काटा जाएगा।