Bihar News: दुर्गाबाड़ी में 1932 से बंगाली समाज के लोग भव्य रूप से दुर्गा प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। परंपरा के अनुसार महिलाएं पहले मां दुर्गा की प्रतिमा को सिंदूर अर्पित करती हैं, फिर पान के पत्ते से गाल छूकर आशीर्वाद लेती हैं।
विजयादशमी के अवसर पर गुरुवार को गया जी शहर के दुर्गाबाड़ी में बंगाली समाज की परंपरा के अनुरूप सुहागिन महिलाओं ने सिंदूर की होली खेली। मान्यता है कि इस दिन मां दुर्गा अपने मायके से ससुराल लौटती हैं। उनकी विदाई के सम्मान में महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर चढ़ाकर एक-दूसरे के साथ सिंदूर की होली खेलती हैं।
दुर्गाबाड़ी में 1932 से बंगाली समाज के लोग भव्य रूप से दुर्गा प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। परंपरा के अनुसार महिलाएं पहले मां दुर्गा की प्रतिमा को सिंदूर अर्पित करती हैं, फिर पान के पत्ते से गाल छूकर आशीर्वाद लेती हैं। इसके बाद वे एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
सिंदूर खेल में शामिल सुजाता मुखर्जी ने बताया कि यह परंपरा मां दुर्गा की विदाई का प्रतीक है। हम मानते हैं कि मां जब ससुराल लौटती हैं तो उन्हें सिंदूर चढ़ाकर विदाई दी जाती है। इसी के साथ हम सभी महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर वैवाहिक जीवन की खुशहाली और लंबी उम्र की कामना करती हैं।
षष्ठी से लेकर नवमी तक श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं और दशमी के दिन विदाई दी जाती है। इस मौके पर बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्रित हुईं और पूरे उत्साह के साथ सिंदूर की होली खेली।