औरंगाबाद में तीन बच्चों के साथ एक विवाहिता के मंगलवार को अहले सुबह लापता हो जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामला सामने आने पर ससुराल वालों की शिकायत पर पुलिस विवाहिता का पता लगाने में जुटी है। उधर, मायके वालों ने ससुराल वालों पर विवाहिता और तीनों बच्चों की हत्या करने का आरोप लगाया है। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। दरअसल, घटना रफीगंज प्रखंड में पौथू थानाक्षेत्र के परसियां गांव का है।
ऐसे मिली मायके वालों को जानकारी
ओबरा प्रखंड में खुदवां थानाक्षेत्र के मोमिनपुर निवासी विवाहिता के पिता रंजीत सिंह ने बताया कि बेटी की गोतनी ने मंगलवार को सुबह फोन कर बताया कि मेरी बेटी के दो बच्चे बीमार होने के बाद अस्पताल में भर्ती थे। वहीं से उनकी बेटी संध्या कुमारी (30), नतनी सृष्टि (10), नाती शिवम (7) और सौरभ (5) सुबह चार बजे लापता हो गए हैं। काफी खोजबीन के बाद भी उनका पता नहीं चल पा रहा है।
दहेज के कारण ससुराल वालों ने की हत्या
विवाहिता के पिता ने आरोप लगाया कि बेटी के ससुराल वाले उनसे दहेज की मांग करते थे। दहेज न देने के कारण ही ससुराल वालों ने उनकी बेटी और बच्चों की हत्या कर शवों को गायब कर दिया है तथा लापता हो जाने की कहानी गढ़ी है।
इधर, पौथू थानाध्यक्ष आकाश राज ने बताया कि विवाहिता संध्या का पति सुधीर यादव राजस्थान के जयपुर में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। मामले में ससुर चनेश्वर यादव ने विवाहिता के तीन बच्चों के साथ लापता होने की शिकायत की है। साथ ही विवाहिता के पिता मोमिनपुर गांव निवासी रंजीत सिंह और चाचा चंद्रमा सिंह ने तीनों बच्चों और विवाहिता की ससुराल वालों द्वारा हत्या कर शव को गायब कर देने की शिकायत की है। पुलिस ने दोनों शिकायत को गंभीरता से लिया है। पुलिस चारों की खोजबीन में जुटी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि वास्तव में विवाहिता बच्चों के साथ गायब हो गई है या बच्चों समेत उसकी हत्या कर दी गई है। मामले में अभी जल्दबाजी में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। लापता और हत्या दोनों ही एंगल से पुलिस मामले की तहकीकात में जुटी है।
उन्होंने कहा कि जब तक शव बरामद नहीं होता है या सभी सकुशल बरामद नहीं किए जाते है, तब तक मामले में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता है। मामले में पुलिस ने एक वाहन चालक को हिरासत में लिया है। इसी चालक ने विवाहिता को बच्चों के साथ इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया था।
मायके वाले हत्या किए जाने की बात पर अड़े
विवाहिता के मायके वालों का कहना है कि संध्या की गोतनी धंनजय कुमार की पत्नी ने ही उन्हें फोन पर कहा कि संध्या नहीं रही। उसके बच्चों के बारे में भी पता चल रहा कि वे नहीं रहे। शव नहीं मिला है। वे दावे के साथ कह रहे है कि गोतनी की बात से ही स्पष्ट है कि सब ने मिलकर संध्या और बच्चों को मार डाला है।
संध्या के चाचा चंद्रमा सिंह ने कहा कि संध्या के ससुर चनेश्वर यादव, सास, ननद, देवर और गोतनी उसके साथ हमेशा मारपीट करते थे। बच्चों को पढ़ाने के लिए पैसे मांगने पर मारपीट की जाती थी। दहेज लाने के लिए दबाव डालते थे। घर में संध्या, उसके तीन बच्चे, सास-ससुर, ननद, गोतनी और देवर साथ रहती थे। सबने मिलकर संध्या और बच्चों को मार दिया है।