एक युवक ने दो बच्चों की मां विधवा औरत से प्रेम करने का नाटक किया। महिला युवक के प्रेमजाल में फंसकर प्रेगनेंट हो गई तो उसने युवक पर शादी करने का दबाव बनाया। इस पर युवक ने बेहद खौफनाक कदम उठाया और उसने अपनी सगी मां संग मिलकर महिला को दो हिस्सों में टांगी से काट डाला। इसके बाद सर को अलग और धड़ को अलग स्थान पर छिपा दिया। इसी मामले में औरंगाबाद की एक अदालत ने सोमवार हत्यारे मां-बेटे को आजीवन सश्रम कैद की सजा सुनाई।
अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि 21 जून 2022 को पहाड़ीपुर गांव के चौकीदार बिंदेश्वरी पासवान ने मुंजहडा बघार के पास एक औरत का काट कर फेंका हुआ और साड़ी बरामद की थी। इसी दौरान उसे दो बच्चें अपनी मां को खोजते मिले। इस पर थे चौकीदार ने दोनों बच्चों को शव का सिर और साड़ी दिखाया, तो उनके द्वारा पहचान अपने मां के सिर होने के रूप में की गई। इसके बाद चौकीदार ने मामले की जानकारी गोह थानाध्यक्ष को दी और वह दोनों बच्चों को लेकर थाना आया। मामले में चौकीदार के बयान पर गोह थाना में प्राथमिकी संख्या-178/22 दर्ज कर पुलिस छानबीन में जुटी। पुलिस को मृतका के दोनों बच्चों से ही जानकारी मिली कि महिला से गोह थाना के सोहलपुरा गांव निवासी कौशल कुमार से संबंध था। यह भी पता चला कि विधवा महिला का मायका रफीगंज थाना के चरकावां गांव में था। इसके बाद पुलिस ने पुलिस ने दोनो बच्चों को मृतका के मायकेवालों को सौंप दिया और युवक के गांव जाकर उसके घर पर छापेमारी की, जहां मां-बेटे पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
आरोपी ने पुलिस के समक्ष युवक ने स्वीकार किया कि शादी के दबाव बनाने के कारण ही उसने अपनी मां संग मिल टांगी से काटकर महिला की हत्या कर दी और सर और धड़ को अलग-अलग स्थान पर फेंक दिया। पुलिस ने युवक की निशानदेही पर मृतका का धड़ भी बरामद कर लिया। मामले में गिरफ्तारी के बाद से ही मां-बेटे जेल में है। इसी मामले में कोर्ट ने आज यह सजा सुनाई।
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सश्रम उम्रकैद के साथ जुर्मना भी
अपर लोक अभियोजक(एपीपी) सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सोमवार को मामले में सजा के बिंदु पर अंतिम सुनवाई करते हुए औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के जिला जज-7 निशित दयाल की अदालत ने गोह थाना कांड संख्या-178/22 एवं सत्रवाद संख्या-454/22 में अभियुक्त मां-बेटे को सश्रम उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने गोह थाना के सोहलपुरा गांव निवासी दोनों अभियुक्तों कौशल कुमार और चंद्रमणि देवी को भादंवि. की धारा 302 के तहत सश्रम उम्रकैद, 50 हजार का जुर्माना, जुर्माना न देने पर एक साल साधारण कारावास, भादंवि की धारा 201 के तहत पांच साल सश्रम कैद, पांच हजार का जुर्माना और जुर्माना नही देने पर छः माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनाई। दोनों सजाएं साथ साथ चलेगी।
आज कोर्ट ने यह सजा सुनाई
मामले में एपीपी ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद से सजा सुनाएं जाने के दिन तक दोनों अभियुक्त कारा में दो साल ग्यारह माह दस दिन बिता चुके हैं। इस समय की उनकी सजा अवधि में कटौती होगी। उन्होने बताया कि मामले के ट्रायल में पुलिस ने घटना के प्रदर्श में सिर और धड़ की फोटो, एफएसएल की रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु समीक्षा प्रतिवेदन और जब्त टांगी को कोर्ट में प्रस्तुत किया था। साथ ही मामले के अनुसंधानकर्ता शमीम अहमद ने घटना को लेकर विस्तार से गवाही दी थी। अभियोजन पक्ष द्वारा मामले को मजबूती से रखने की वजह से कोर्ट ने अभियुक्तों को 24 मई को दोषी ठहराया था और आज कोर्ट ने यह सजा सुनाई। कोर्ट के न्यायधीश ने आदेश में मृतका के दोनों बच्चों को बिहार पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना 2014 के प्रावधानों के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद को क्षतिपूर्ति का विनिश्चय करने को भी कहा है।