पटना हाईकोर्ट ने नगर निकाय चुनाव में पिछड़ी (ओबीसी) और अति पिछड़ी जातियों (ईबीसी) के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव कराने पर रोक लगा दी। इस बीच, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने बुधवार को कहा है कि पिछड़ों को आरक्षण बहाल किए जाने के बाद ही राज्य में नए निकाय चुनाव होंगे।
सभी आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी के रूप में अधिसूचित किए जाने के बाद जदयू के अध्यक्ष राजीव रंजन और संसदीय बोर्ड के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने यहां संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही।
राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने दो चरणों (10 अक्तूबर और 20 अक्तूबर) में होने वाले चुनावों को यह कहते हुए टाल दिया है कि नई तारीखों की घोषणा उचित समय पर की जाएगी। जदयू नेताओं ने कहा, आरक्षण में कोई अवैधता नहीं है। इन्हें नतीश कुमार सरकार ने 2006 में पंचायतों के लिए और एक साल बाद शहरी निकायों के लिए लागू किया गया था। जदयू नेताओं ने कहा कि हमें संदेह है कि गड़बड़ी में भाजपा का हाथ है। भाजपा और उसकी मूल संस्था आरएसएस हमेशा कोटा का विरोध करती रही है।
जदयू नेताओं ने कहा कि अगर हम शहरी स्थानीय निकायों में आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं के बैकग्राउंड की जांच करें तो उनके भाजपा के सांथ संबंध सामने आएंगे। हाईकोर्ट के आदेश का भाजपा के कई नेताओं ने निजी तौर पर जश्न मनाया। इसे सत्यापित (वेरिफाई) किया जा सकता है।
नीतीश कुमार की जदयू 2013 तक भाजपा की सहयोगी पार्टी थी। लेकिन दोनों पार्टियों के बीच मतभेदों के कारण गठबंधन टूट गया। इसके बाद 2017 में दोनों दलों ने फिर से गठबंधन किया और 2019 में लोकसभा चुनाव और अगले साल 2020 में विधानसभा चुनाव एक साथ लड़े। इसके अगस्त 2022 तक यह गठबंधन की सरकार चलती रही। लेकिन नीतीश कुमार ने फिर जदयू को तोड़ने की कोशिशों का आरोप लगाते हुए फिर भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ दिया।
उधर भाजपा कानून तकरार के लिए नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहरा रही है और आरोप लगा रही कि उनकी (नीतीश) सरकार ने चुनावी उद्देश्यों के लिए आरक्षण की सिफारिश के लिए एक स्वतंत्र आयोग के गठन जैसी औपचारिकता पूरी नहीं की।