करीब दो महीने तक चले चुनावी शोरगुल के बीच गुरुवार को हुए अंतिम चरण के मतदान के साथ ही बिहार में चुनावों पर विराम लग गया। अंतिम चरण की 57 सीटों के लिए शाम पांच बजे समाप्त हुए मतदान में कुल 59.46 फीसदी वोटिंग हुई। दरभंगा, कोसी और पूर्णिया प्रमंडल में हुए इस चुनाव को लेकर मतदाताओं में जबरदस्त जोश रहा। लोग सुबह से ही लाइन लगाकर घरों से बाहर निकले तो मतदान के पुराने रिकार्ड ध्वस्त होने लगे।
चुनावों के लिए आयोग ने भी जबरदस्त तैयारियां की थी। बांग्लादेश व नेपाल की सीमाओं को सील कर दिया गया। संवेदनशील भागों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई थी। आखिरी चरण के मतदान के बाद अब जनता का फैसला आठ नवंबर को ही पता चलेगा, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि अंतिम चरण का फैसला ही बिहार का बिहार का फैसला होगा। इस चरण में सबसे अधिक 57 सीटों पर मतदान हुआ है।
यह इलाका अल्पसंख्यक और पिछड़ा बहुल है। ऐसे में राजग और महागठबंधन के बीच कांटे का मुकाबला है। इस चरण में पप्पू यादव, तारिक अनवर और ओवैशी जैसे नेताओं की राजनीतिक हैसियत भी तय होनी है।
रामविलास पासवान का गृह क्षेत्र भी इस इलाके में आता है, इसी इलाके ने लालू को 15 वर्षों तक बिहार की सत्ता पर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।
अल्पसंख्यक और पिछड़ा बहुल इलाकों में मतदान
पांचवें और अंतिम चरण के मतदान में इस बार युवाओं पर दारोमदार रहा। इस चरण में सबसे ज्यादा युवा मतदाता है। युवाओं के बीच भाजपा की पकड़ तो मजबूत है, लेकिन युवाओं का पलायन उस समर्थन को वोट में कितना बदल पाएगा, यह देखना होगा।
इस इलाके में नीतीश विरोधी लहर कहीं देखने को नहीं मिलती, लेकिन मोदी का जलवा भी कायम है। खासतौर पर महिला वोटरों के बीच इन्हीं दो चेहरों के बीच मुकाबला है। वैसे निर्णायक भूमिका वाले इन मतदाताओं को लुभाने के लिए राजग और महागठबंधन की ओर से प्रयास किए गए हैं।
राजग ने जहां लैपटॉप और स्कूटी पर दांव खेला है। वहीं, महागठबंधन के नेता महिलाओं को नौकरी में आरक्षण, युवाओं को अंग्रेजी और कंप्यूटर सिखाने व वाईफाई से लुभाने में जुटे हैं।
बिहार चुनाव प्रचार में पीएम ने की 26 सभाएं
करीब दो महीने तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल के आधे सदस्य बिहार में पसीना बहाते रहे। अकेले प्रधानमंत्री की 26 सभाएं हुई।
भाजपा की स्थापना के बाद यह पहला चुनाव रहा जिसके प्रचार अभियान से लालकृष्ण आडवाणी, शत्रुघ्न सिन्हा व मुरली मनोहर जोशी सरीखे दिग्गज दूर रहे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पांचों चरण में कुल 230 सभाएं कीं।
लालू ने 33 दिनों में ही 251 सभाओं को संबोधित किया। बिहार में अपनी जमीन वापस पाने में जुटी कांग्रेस की ओर से अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कुल चार सभाएं कीं, जबकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने 12 चुनावी सभा की।