बिहार कांग्रेस में विधायकों के आस्था परीक्षण पर मचे घमासान का हल पार्टी नेतृत्व ने निकाल लिया है। बिहार में सत्ता से दूर होने के बाद के घटनाक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी की भूमिका से आलाकमान नाराज है, लिहाजा उन्हें हटाया जाना तय माना जा रहा है।
फिलहाल पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी के दरबार में 27 में से 22 विधायकों की हाजिरी से पार्टी टूटने का खतरा टलता नजर आ रहा है। बृहस्पतिवार को भी 11 विधायकों और तीन एमएलसी ने दिल्ली पहुंचकर पार्टी के प्रति अपनी आस्था प्रदर्शित की। लेकिन पांच विधायकों की अनुपस्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।
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हालांकि इनमें से दो विधायकों ने अनुपस्थिति का कारण डेंगू-मलेरिया से पीड़ित होना बताया है लेकिन सूत्रों की मानें तो दिल्ली न आने वाले विधायकों में कुछ नीतीश के करीबी बताए जा रहे हैं। नीतीश की पसंद के चलते ही इन्हें कांग्रेस से टिकट दिया गया था।
ये विधायक अगर पार्टी छोड़ते हैं तो इन्हें विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर फिर चुनाव लड़ना पड़ेगा। लिहाजा कांग्रेस के रणनीतिकार इस कोशिश में हैं कि जल्द ही इन्हें दिल्ली बुलाकर बात की जाए।इस घटनाक्रम में आलाकमान ने दिल्ली की बैठक से अनुपस्थित रहने वाले प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी को पार्टी तोड़ने की कोशिश का दोषी माना है।
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एक सप्ताह पहले पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद भी उनकी भूमिका संदिग्ध रही है। वह बीते दो दिनों से खुलकर मीडिया के सामने राज्य से जुड़े वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लगा रहे हैं कि कुछ नेता उन्हें हटवाना चाहते हैं और आलाकमान के सामने उन्हें गलत साबित किया जा रहा है।