12 मई को बिहार की आठ सीटों पर मतदान होने जा रहा है। इनमें वाल्मीकिनगर, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, गोपालगंज, सिवान, महाराजगंज शामिल हैं। सभी आठ सीटों पर अभी राजग का कब्जा है। सभी सीटों पर मुख्य मुकाबला विपक्षी दलों के महागठबंधन और एनडीए के बीच है। कुल 127 प्रत्याशी मैदान में हैं। इस चरण में केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह, जनार्दन प्रसाद सिग्रीवाल, रमा देवी सहित आधा दर्जन बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। जानिए सीटों का राउंडअप।
पश्चिम चंपारण : नये-पुराने की लड़ाई
यहां चुनाव नये व पुराने नेता के बीच है। भाजपा के डॉ. संजय जायसवाल तीसरी बार चुनाव मैदान में हैं, सामने पहली बार चुनाव लड़ रहे रालोसपा के बृजेश कुशवाहा हैं। जायसवाल दो बार से फिल्म निर्माता प्रकाश झा को करारी शिकस्त देकर जीत रहे हैं। झा जहां 2009 में लोजपा में थे, तो 2014 में पार्टी बदल जदयू से लड़े, फिर भी हारे।
इस बार जायसवाल के सामने स्थानीय उम्मीदवार है। 2004 के बाद से पहली बार मुकाबला गैर ब्राह्मण से है। जायसवाल को अपने वैश्य समाज के वोटों और पिछले दो चुनाव में प्रमुख प्रतिद्वंदी रही पार्टियों के भाजपा गठबंधन में आने से जीत की उम्मीद है। बृजेश को अपनी जाति और राजद के वोटों से निर्णय पक्ष में आने की उम्मीद है।
वाल्मीकि नगरः राजस्व जिले का दर्जा बड़ी मांग
यहां मुख्य मुकाबला जदयू के वैद्यनाथ महतो और कांग्रेस के शाश्वत केदार में है। पुलिस जिले का दर्जा मिलने के बाद से बगहा को राजस्व जिले का दर्जा दिलाने की मांग यहां चुनावी मुद्दा रहा है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश को जोड़नेवाले एनएच की बदहाली, गंडक पार के चार प्रखंडों को अनुमंडल मुख्यालय से जोड़ने के लिए पुल की मांग, डिग्री कॉलेज की स्थापना के साथ उच्च शिक्षा की व्यवस्था आदि स्थानीय मुद्दे लोगों के बीच चर्चा में रहे हैं।
पूर्वी चंपारणः राष्ट्रवाद हावी
इस सीट पर भाजपा के राधामोहन सिंह और रालोसपा के आकाश सिंह में मुकाबला है। यहां स्थानीय मुद्दों से अधिक राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनाव हो रहा है। वैसे इस क्षेत्र में स्थानीय किसानों को उनकी उपेक्षा खटक रही है। बंद चीनी मिलों को चालू कराने और गन्ना उत्पादकों का बकाया भुगतान भी लंबित है। बेरोजगारी, अपराध और महंगाई जैसे मुद्दे यहां चर्चा में हैं।
शिवहरः बाढ़-सूखा जैसे मुद्दे गायब
यहां भाजपा की मौजूदा सांसद रमादेवी और राजद के फैसल अली में मुकाबला है। यहां बाढ़-सूख, शिक्षा, एनएच 104 का चौड़ीकरण, साफ पेयजल, बागमती सिंचाई परियोजना जैसे स्थानीय मुद्दे हैं तो लेकिन मुख्य चुनावी बहस में ये मुद्दे यहां गौण हैं।
सिवानः जदयू की कविता सिंह और राजद की हिना शहाब में मुकाबला
यहां बेरोजगारी और अपराध पर लगाम लगाना बड़े मुद्दे हैं। जिले में एक सूता मिल और तीन चीनी मिलें थी, जो बंद हैं। अधिकतर युवा रोजगार के लिए खाड़ी देश जाते हैं। ऐेसे में रोजगार यहां एक मुद्दा है।
वैशालीः भूमिहार वोटरों पर रहेगी नजर
इस सीट पर भूमिहारों के जातीय समीकरण निर्णायक रहे हैं। यहां के 12 चुनावों में से दस बार राजपूत प्रत्याशी, दो बार भूमिहार उम्मीदवार को जीत मिली। इस बार वैशाली में राजद के कद्दावर नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह का मुकाबला और लोजपा प्रत्याशी वीणा देवी से है।