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बिहार: नाबालिग लड़की से छेड़खानी मामले को लेकर एडीजी ने की समीक्षा, त्वरित स्पीडी ट्रायल से जल्द सजा दिलाने के

Fri, 25 Sep 2026 05:54 PM IST
दरभंगा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर

सार

समस्तीपुर के जगतसिंहपुर वायरल वीडियो मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद एडीजी डॉ. कमल किशोर सिंह ने मामले की समीक्षा की। उन्होंने जांच में तेजी लाने, वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने और स्पीडी ट्रायल की दिशा में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
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समस्तीपुर में नाबालिग लड़की से बदसलूकी मामले में समीक्षा करने पहुंचे एडीजी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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समस्तीपुर के कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंहपुर में लड़की के साथ कथित बदसलूकी और छेड़खानी के वायरल वीडियो मामले में पुलिस-प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के बाद चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब पुलिस की जांच और अभियोजन प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। एडीजी डॉ. कमल किशोर सिंह ने शुक्रवार को समस्तीपुर पहुंचकर मामले की समीक्षा की। उन्होंने जिला प्रशासन की कार्रवाई पर संतुष्टि व्यक्त करते हुए मामले को गंभीरता से लिया और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए त्वरित स्पीडी ट्रायल चलाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने तथा जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए।

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साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से जुटाने पर जोर
एडीजी ने स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील मामलों में अनुसंधान को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए। साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से संकलन करते हुए जांच पूरी करने और मामले को न्यायालय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की प्रक्रिया तेज करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस तरह के मामलों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है।

अपराध नियंत्रण और लंबित मामलों की समीक्षा
शुक्रवार को समस्तीपुर पहुंचे एडीजी डॉ. कमल किशोर सिंह ने पुलिस अधिकारियों के साथ अपराध नियंत्रण, लंबित कांडों के निष्पादन और अनुसंधान की समीक्षा की। उन्होंने लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के साथ प्रभावी पुलिसिंग पर भी जोर दिया।
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गिरफ्तारी के बाद अब मजबूत अनुसंधान की चुनौती
अब इस मामले में पुलिस जांच पूरी कर आरोपपत्र और अभियोजन की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ाती है, इस पर नजर रहेगी। एडीजी के क्विक ट्रायल के निर्देश के बाद पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मजबूत अनुसंधान कर मामले को न्यायालय में प्रभावी ढंग से रखने की भी बड़ी चुनौती है।

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