बिहार के पंचायती राज मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा कि चंपारण के महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद वंशी चाचा ने बैरगनिया और सीतामढ़ी को जोड़ने वाले पुल के निर्माण के लिए आत्मदाह कर लिया था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। यह पुल न बनने के कारण बैरगनिया भारत में होते हुए भी नेपाल का हिस्सा बना हुआ था। उन्होंने बताया कि वंशी चाचा की स्मृति में पटना के मिलर हाई स्कूल में 13 अप्रैल को कानून हलवाई विचार मंच द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसी आयोजन में समाज के अन्य लोगों के साथ-साथ समस्तीपुर के लोगों को भी आमंत्रित करने के लिए वे यहां आए हैं।
‘पूर्व सरकारों की उदासीनता के कारण शहीद हुए वंशी चाचा’
पत्रकारों को संबोधित करते हुए पंचायती राज मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी वंशी चाचा ने बागमती नदी पर पुल बनाने के लिए सरकार को 19 नवंबर 1997 तक का समय दिया था। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगर इस अवधि के भीतर पुल का निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो वे आत्मदाह कर लेंगे। लेकिन पूर्व की सरकारों ने इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे मजबूर होकर उन्होंने आत्मदाह कर लिया।
‘एनडीए सरकार में पूरा हुआ पुल निर्माण का सपना’
मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने बताया कि बिहार में जब एनडीए की सरकार बनी, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के प्रयासों से इस पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ। केंद्रीय मंत्री प्रमोद महाजन ने इस पुल का उद्घाटन किया था। उन्होंने कहा कि यह पुल न केवल बैरगनिया और सीतामढ़ी को जोड़ता है, बल्कि यह वंशी चाचा के बलिदान की याद भी दिलाता है।
वंशी चाचा की स्मृति में होगा भव्य आयोजन
मंत्री ने कहा कि 13 अप्रैल को पटना के मिलर हाई स्कूल में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में कानून हलवाई समाज के साथ ही अन्य लोगों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। इस मौके पर विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र कुमार गुप्ता, चंदन कुमार, प्रदीप कुमार, शिवे, अभिषेक ज्ञानू, सुरेश चंद्र प्रसाद, प्रेम कुमार गुप्ता, अनिल कुमार मुखिया सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। मंत्री ने सभी से इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की, ताकि शहीद वंशी चाचा के बलिदान को याद किया जा सके और समाज को उनके योगदान से प्रेरणा मिल सके।