समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर, मोहनपुर व विद्यापतिनगर प्रखंडों में करीब एक माह तक बाढ़ की मार झेलने के बाद दियारा क्षेत्र के लोगों ने जैसे-तैसे जिंदगी को पटरी पर लाना शुरू ही किया था कि गंगा के जलस्तर में फिर तेजी से वृद्धि ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। नदी का पानी एक बार फिर खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर पहुंच गया है। इसके साथ ही मोहनपुर, मोहिउद्दीननगर और विद्यापतिनगर के निचले इलाकों में दोबारा पानी फैलने लगा है। खेतों के बाद अब स्कूल, पहुंच पथ और ग्रामीण आबादी भी इसकी चपेट में आने लगी है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि सितंबर महीने के मध्य में आई बाढ़ का असर पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ था और गंगा नदी फिर उफान पर आ गई। पिछले दिनों पानी घटने के बाद ग्रामीणों ने घर-गृहस्थी संभालने, खेतों को रबी की बुआई के लिए तैयार करने और बच्चों को दोबारा स्कूल भेजने की तैयारी शुरू की थी। लेकिन जलस्तर में ताजा वृद्धि ने इन उम्मीदों पर फिर पानी फेरना शुरू कर दिया है।
चार स्कूलों में फिर घुसा पानी, पढ़ाई पर लगा ब्रेक
गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर का सबसे सीधा असर दियारा क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा है। उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मनियर, प्राथमिक विद्यालय महावीर स्थान चकला, प्राथमिक विद्यालय बिंदटोल आनंदगोलवा और प्राथमिक विद्यालय बाबापट्टी चापर के परिसर में फिर बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। विद्यालय परिसर और आसपास जलजमाव के कारण पठन-पाठन प्रभावित हुआ है। कई स्कूलों तक पहुंचने वाले रास्ते भी पानी से प्रभावित हुए हैं। इससे बच्चों और शिक्षकों के लिए विद्यालय पहुंचना मुश्किल हो रहा है। अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इससे पहले सितंबर की बाढ़ में भी दियारा क्षेत्र के बड़ी संख्या में स्कूलों में पानी प्रवेश करने से पढ़ाई बाधित हुई थी। पानी उतरने के बाद विद्यालयों में एक सप्ताह पहले ही पढ़ाई सामान्य हुई थी कि गंगा के फिर बढ़ते जलस्तर ने स्थिति को दोबारा बिगाड़ दिया। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो दियारा क्षेत्र के और विद्यालय प्रभावित हो सकते हैं।
खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बह रही गंगा
बाढ़ नियंत्रण विभाग के सरारी स्थल से मिली जानकारी के अनुसार, गंगा का खतरे का निशान 45.50 मीटर निर्धारित है। मौजूदा जलस्तर इससे करीब एक मीटर ऊपर पहुंच चुका है और नदी में अभी वृद्धि की प्रवृत्ति बनी हुई है। सितंबर की बाढ़ के दौरान भी सरारी क्षेत्र में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर चला गया था। उस दौरान तीन प्रखंडों के दर्जनों गांव प्रभावित हुए थे और बड़ी संख्या में स्कूलों में पानी घुस गया था। गंगा नदी के फिर बढ़ने से निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। पानी जिस तरह खेतों और आबादी की ओर बढ़ रहा है, उससे प्रशासन के साथ-साथ ग्रामीण भी जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
खेतों में पानी पहुंचा तो रबी की बुआई पर संकट
बाढ़ का पानी उतरने के बाद किसानों ने रबी फसल की तैयारी शुरू करने की उम्मीद जताई थी। लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के बाद खेतों से पानी निकलने पर किसानों को लगा था कि खरीफ के नुकसान के बाद कम से कम रबी की फसल से कुछ राहत मिल सकेगी। लेकिन खेतों में दोबारा पानी पहुंचने लगा है। मोहिउद्दीननगर प्रखंड स्थित घटहाटोल निवासी संतोष सिंह, आर्यन सिंह, नंदकिशोर सिंह, हरेन्द्र सिंह ने बताया कि यदि जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला जारी रहा और खेतों में लंबे समय तक जलजमाव बना रहा तो रबी की बुआई में देरी हो सकती है। इसका असर फसल के उत्पादन पर भी पड़ने की आशंका है। सितंबर की बाढ़ में भी किसानों को खरीफ फसल के साथ कृषि कार्य और पशुपालन को लेकर भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था।
बाढ़ लौटी तो बढ़ेंगी रोजमर्रा की मुश्किलें
रासपुर पतसिया निवासी राणा संजीव सिंह, राणा अभिमन्यु सिंह, राणा मनोज सिंह, राणा आशीष सिंह आदि ने बताया कि दियारा क्षेत्र में गंगा के जलस्तर का बढ़ना सिर्फ खेत और स्कूल तक सीमित नहीं है। निचले इलाकों में पानी फैलने के साथ ग्रामीणों के आवागमन, पशुचारा, पेयजल और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी असर पड़ सकता है। इससे पहले जलस्तर बढ़ने पर कई ग्रामीण सड़कों पर पानी चढ़ गया था और कुछ इलाकों में नाव आवागमन का प्रमुख साधन बन गई थी। ग्रामीणों की नजर अब गंगा के जलस्तर पर टिकी है। एक माह तक बाढ़ का दर्द झेलने के बाद मिली राहत के तुरंत बाद दोबारा बढ़ता पानी यह संकेत दे रहा है कि दियारा क्षेत्र के लिए बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है।