समस्तीपुर रेल मंडल ने इस बार भीड़ प्रबंधन का नया प्लान तैयार किया है। छठ महापर्व पर बिहार आने और पर्व समाप्त होने के बाद वापस लौटने वाले यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए समस्तीपुर जंक्शन समेत मंडल के 13 प्रमुख स्टेशनों पर करीब 50 लाख रुपये की लागत से अस्थायी होल्डिंग एरिया तैयार किए जाएंगे। कुल 88,650 वर्गफीट क्षेत्र में बनने वाले इन होल्डिंग एरिया में यात्रियों को पहले रोका जाएगा और ट्रेन के आने तथा प्लेटफार्म पर जगह उपलब्ध होने के बाद उन्हें चरणबद्ध तरीके से प्लेटफार्म पर भेजा जाएगा। रेलवे की यह व्यवस्था 16 से 25 नवंबर के बीच प्रभावी रखने की तैयारी है। इसका मकसद छठ के दौरान स्टेशन पर अचानक उमड़ने वाली भीड़ को सीधे प्लेटफार्म तक पहुंचने से रोकना और यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित रखना है। खासकर उन भीड़ के समयों में जब एक साथ कई ट्रेनों के यात्री स्टेशन पहुंचते हैं, होल्डिंग एरिया को भीड़ के दबाव को संभालने वाले अस्थायी बफर जोन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
13 स्टेशनों पर तैयार होगा अस्थायी होल्डिंग एरिया
रेल मंडल के जिन स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया तैयार किए जाएंगे, उनमें समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधुबनी, सकरी, जयनगर, रक्सौल, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया कोर्ट, ललितग्राम, बापूधाम मोतिहारी और बेतिया शामिल हैं। यात्रियों की संभावित संख्या और स्टेशन पर भीड़ के दबाव को देखते हुए अलग-अलग स्टेशनों पर अलग क्षेत्रफल निर्धारित किया गया है। समस्तीपुर और सीतामढ़ी में 10-10 हजार वर्गफीट, रक्सौल और सहरसा में आठ-आठ हजार, मुजफ्फरपुर में 9,510, दरभंगा में 7,200 और जयनगर में छह हजार वर्गफीट क्षेत्र में होल्डिंग एरिया विकसित किया जाएगा।
पहले होल्डिंग एरिया में ठहराव, फिर प्लेटफार्म पर एंट्री
इस व्यवस्था में यात्रियों को ट्रेन के प्लेटफार्म पर पहुंचने के लिए अनावश्यक रूप से पहले से जाने की जरूरत नहीं होगी। संबंधित ट्रेन के यात्रियों को निर्धारित होल्डिंग एरिया में रखा जाएगा। ट्रेन के आगमन और प्लेटफार्म की स्थिति को देखते हुए उन्हें समूहवार आगे भेजा जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ट्रेन के इंतजार में बड़ी संख्या में यात्री एक साथ प्लेटफार्म पर जमा नहीं होंगे। रेलवे का उद्देश्य यात्रियों की आवाजाही को इस तरह नियंत्रित करना है कि प्लेटफार्म पर क्षमता से अधिक भीड़ न बने।
पानी से लेकर मेडिकल बूथ तक, यात्रियों को मिलेंगी सुविधाएं
होल्डिंग एरिया में यात्रियों की बुनियादी जरूरतों का भी ध्यान रखा जाएगा। यहां पेयजल, ट्रेन की उद्घोषणा, मेडिकल बूथ और सहायता केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है। ट्रेन के आगमन और प्लेटफार्म से जुड़ी सूचनाएं उद्घोषणा के माध्यम से दी जाएंगी, ताकि यात्री सही समय पर संबंधित प्लेटफार्म की ओर जा सकें।
असली परीक्षा छठ के बाद वापसी के दौरान होगी
छठ के दौरान रेलवे के सामने सिर्फ बिहार आने वाले यात्रियों की भीड़ संभालने की चुनौती नहीं होती। अर्घ्य के बाद बड़ी संख्या में यात्री दिल्ली, मुंबई, सूरत, पंजाब, हरियाणा, कोलकाता और देश के दूसरे शहरों की ओर लौटते हैं। इसी दौरान स्टेशनों पर अचानक यात्री दबाव बढ़ता है। ऐसे में होल्डिंग एरिया की व्यवस्था वापसी की भीड़ के दौरान ज्यादा महत्वपूर्ण होगी। यात्रियों को ट्रेन के समय के अनुसार अलग-अलग समूहों में रोककर प्लेटफार्म पर भेजने से एक साथ बड़ी संख्या में यात्रियों के पहुंचने से बनने वाली स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश होगी।
समस्तीपुर और सीतामढ़ी में सबसे बड़ा क्षेत्र
क्षेत्रफल के लिहाज से समस्तीपुर और सीतामढ़ी में 10-10 हजार वर्गफीट का होल्डिंग एरिया तैयार किया जाएगा। इसके बाद मुजफ्फरपुर में 9,510 वर्गफीट, रक्सौल और सहरसा में आठ-आठ हजार, दरभंगा में 7,200 तथा जयनगर में छह हजार वर्गफीट क्षेत्र निर्धारित किया गया है। इससे स्पष्ट है कि संभावित यात्री दबाव के अनुसार स्टेशनों पर अलग-अलग क्षमता की व्यवस्था की जा रही है।
भीड़ प्रबंधन के साथ सुरक्षा पर भी रहेगा जोर
पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र के अनुसार, छठ के दौरान स्टेशन के प्रवेश द्वार, फुटओवर ब्रिज, प्लेटफार्म और निकास मार्गों पर यात्रियों का दबाव बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में होल्डिंग एरिया के साथ कतार प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित तरीके से रखने पर रेलवे का फोकस रहेगा। कुल मिलाकर इस बार समस्तीपुर रेल मंडल की तैयारी का फोकस सिर्फ अतिरिक्त ट्रेनें चलाने पर नहीं, बल्कि यात्रियों को स्टेशन परिसर में सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से ट्रेन तक पहुंचाने पर है। 13 स्टेशनों पर तैयार होने वाले होल्डिंग एरिया में पहले यात्रियों को नियंत्रित किया जाएगा और प्लेटफार्म की स्थिति के अनुसार उन्हें आगे भेजा जाएगा। छठ से पहले घर आने और पर्व के बाद वापस लौटने दोनों चरणों में यह व्यवस्था रेलवे के भीड़ प्रबंधन की अहम कड़ी होगी।