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Bihar: अद्भुत शक्ति वाले सूरदास भुल्लू सहनी को CM नीतीश ने किया सम्मानित, अब तक बचा चुके हैं 13 लोगों की जान

Fri, 28 Feb 2025 05:16 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर

सार

Samastipur News: अद्भुत शक्ति वाले सूरदास भुल्लू सहनी को CM नीतीश कुमार ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। दरअसल, पानी के अंदर सब कुछ देखने की क्षमता रखने वाले भुल्लू सहनी अब तक 13 लोगों की जान बचा चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर...।
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सूरदास भुल्लू सहनी को सम्मानित करते CM नीतीश कुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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समस्तीपुर के पटोरी प्रखंड के दुमदुमा गांव निवासी भुल्लू सहनी का नाम आज पूरे बिहार में चर्चित हो चुका है। जन्म से ही दृष्टिहीन होने के बावजूद पानी में उतरते ही सब कुछ देखने की उनकी अनोखी शक्ति ने उन्हें खास बना दिया है। अब तक वह 13 लोगों की जान बचा चुके हैं और 14 शव नदी और तालाब के अंदर से निकाल चुके हैं। उनके इस असाधारण सेवा कार्य को देखते हुए बिहार पुलिस सप्ताह कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें प्रशस्ति पत्र और 10,000 रुपये की नकद राशि देकर सम्मानित किया।

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पानी के अंदर दिखता है सब कुछ
भुल्लू सहनी जब जमीन पर होते हैं, तो सामने खड़े व्यक्ति को देख नहीं सकते। उनके लिए हर चीज बस एक छाया के समान होती है। लेकिन पानी के अंदर उतरते ही उनके लिए सब कुछ स्पष्ट हो जाता है, जैसे कोई चश्मा पहन लिया हो। इसी अनोखी शक्ति की वजह से वह नदी-तालाब में डूबे लोगों को न सिर्फ बचा लेते हैं, बल्कि अगर किसी की मौत हो चुकी हो, तो उसका शव भी खोजकर बाहर निकालते हैं।
 
बचाई कई जिंदगियां, बाया नदी से है खास नाता
भुल्लू सहनी का परिवार पीढ़ियों से बाया नदी के किनारे रहता आया है। नदी और तालाब में तैरना उनके लिए सड़क पर चलने जितना आसान है। उनका दावा है कि अब तक 13 लोगों की जान बचा चुके हैं और 14 शव निकाल चुके हैं।
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झालमूड़ी बेचकर करते हैं गुजारा
अपनी इस अनोखी प्रतिभा और समाज सेवा के बावजूद भुल्लू सहनी का जीवन संघर्षों से भरा है। वह झालमूड़ी बेचकर अपना गुजारा करते हैं और इलाके में ‘सूरदास झालमूड़ी वाले’ के नाम से मशहूर हैं। जब कहीं शव निकालने का काम होता है, तो लोग उन्हें बख्शीश के तौर पर जो कुछ दे देते हैं, उसी में वह खुश हो जाते हैं। उनके परिवार में माता-पिता, भाई और भाभी हैं। उनकी शादी भी हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर चली गई।
 
बांसुरी की तान से लोगों को करते हैं मंत्रमुग्ध
भुल्लू सहनी बांसुरी बजाने के भी शौकीन हैं। खाली समय में वह बांसुरी बजाकर अपना मन बहलाते हैं। झालमूड़ी बेचते समय भी चौक-चौराहों पर बांसुरी बजाते हैं, जिससे लोग उनकी ओर आकर्षित होते हैं। भुल्लू सहनी न केवल अपनी अनोखी शक्ति से लोगों की जान बचाते हैं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं। उनकी संघर्ष भरी जिंदगी और सेवा कार्य को देखते हुए अब सरकार और समाज को भी उनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए।

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