मधुबनी जिले के भैरव स्थान थाना क्षेत्र के झौऊआ गांव में भूमि विवाद के कारण पांच अगस्त 1997 को हुई हत्या के मामले में 27 साल बाद अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। मधुबनी व्यवहार न्यायालय की जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी की अदालत ने 14 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि 11 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर रिहा कर दिया गया।
सरकार हाईकोर्ट में करेगी अपील
लोक अभियोजक मनोज तिवारी ने मीडिया को बताया कि जो 11 आरोपी संदेह के लाभ के आधार पर रिहा किए गए हैं, उनके खिलाफ सरकार उच्च न्यायालय में अपील करेगी। फैसले के दिन मधुबनी न्यायालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। अभियुक्तों को सुरक्षा घेरे में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी की अदालत में पेश किया गया।
सरकार की ओर से लोक अभियोजक मनोज तिवारी और अपर लोक अभियोजक अजीत कुमार सिन्हा ने पक्ष रखा। हालांकि इस मामले में विशेष लोक अभियोजक दिवंगत कमल नारायण यादव भी सरकार की ओर से पक्ष रख चुके हैं। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दीनानाथ यादव और सूरत कुमार मिश्रा ने दलीलें दीं।