रसोई गैस की किल्लत के कारण बाजारों में मिलने वाले सामान की धीरे-धीरे कमी होने लगी है। बाजारों में सुधा डेयरी के काउंटर से रसगुल्ले और गुलाब जामुन मिलना बंद हो गया है। वहीं ग्रामीण इलाकों से शहर में आकर पढ़ाई करने वाले छात्र भी अब फिर से गांव की ओर लौटने लगे हैं।
कैंटीन प्रबंधन की मजबूरी
जीविका कैंटीन के मैनेजर अमित कुमार ने बताया कि उनकी प्राथमिकता किसी भी कीमत पर मरीजों को भोजन देना है, जिसके लिए वे लगातार करीब एक महीने से प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके कैंटीन में प्रतिदिन चार से पांच सिलेंडर की खपत होती थी, लेकिन वर्तमान में किल्लत के दौर में चार से पांच दिनों में ही पांच सिलेंडर मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा गैस की खपत 1500 अंडे उबालने और रोटी बनाने में होती है। सिलेंडर की आपूर्ति कम होने के कारण मरीजों को रोटी देना बंद कर दिया गया है। दोनों समय करीब 1700 मरीजों को भात, दाल और सब्जी दी जा रही है। कैंटीन में काम करने वाले लोगों को भी केवल चावल, दाल और सब्जी ही दी जा रही है। नाश्ते में मिलने वाले समोसा, चाय सहित सभी प्रकार के मेन्यू को बंद कर दिया गया है।
छात्र और मजदूर भी परेशान
वहीं, नाका पांच के लॉज में रहने वाले रोशन कुमार और साकेत सिंह ने बताया कि बिना गैस के खाना बनाना असंभव हो गया है। बिजली या कोयले के चूल्हे पर खाना बनाने पर लॉज संचालक आपत्ति जताते हैं। केरोसिन स्टोव पर भी खाना बनाने में दिक्कत होती है, जिससे शहर में रहने का खर्च काफी बढ़ गया है।
उन्होंने बताया कि माता-पिता भी कुछ दिनों तक घर में रहकर पढ़ाई करने की सलाह दे रहे हैं, इसलिए वे गांव जाने की योजना बना रहे हैं। कोचिंग सेंटर से ऑनलाइन लिंक मिलते ही वे वापस लौट आएंगे। इसी तरह की परेशानियों से दिहाड़ी मजदूर भी जूझ रहे हैं। जिले के कुशेश्वरस्थान, बिरौल, घनश्यामपुर आदि प्रखंडों के मजदूर होटल में खाने से मजदूरी घटने की बात बता रहे हैं।
सुधा डेयरी पर भी असर
एलपीजी क्राइसेस का असर सिर्फ आम लोगों पर ही नहीं बल्कि उद्योगों पर भी पड़ रहा है। दरभंगा सुधा डेयरी के प्रबंधक डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि 17 मार्च से ही कॉमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है। इस संबंध में एजेंसी को डेयरी की ओर से पत्र लिखा गया है और शीघ्र आपूर्ति का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने बताया कि रसगुल्ले के उत्पादन में एलपीजी की आवश्यकता होती है, जिसकी आपूर्ति बाधित है। वहीं सुधा के अन्य उत्पादों के निर्माण में एलपीजी की जरूरत नहीं होती, क्योंकि उनका निर्माण बॉयलर के माध्यम से होता है, जो डीजल से सामान्य रूप से संचालित हो रहा है।
प्रशासन की अपील
दरभंगा के डीएम कौशल कुमार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सजग रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग एवं अन्य समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम 245055 सक्रिय है। एलपीजी से संबंधित शिकायत यहां दर्ज कराई जा सकती है, जिसका समाधान संबंधित पदाधिकारी के माध्यम से किया जा रहा है।