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Bihar News: सात साल के बच्चे की हत्या मामले में सेवानिवृत्त शिक्षक को चार साल की सजा, 18 साल बाद आया फैसला

Mon, 24 Feb 2025 07:29 PM IST
दरभंगा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा

सार

Darbhanga News: दरभंगा में सात साल के बच्चे की हत्या मामले में अदालत ने सेवानिवृत्त शिक्षक को चार साल की सजा सुनाई है। हालांकि न्याय मिलने में 18 साल की देरी से पीड़ित पर संतुष्ट नहीं है। पढ़ें पूरी खबर...।
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दरभंगा व्यवहार न्यायालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दरभंगा के व्यवहार न्यायालय ने सात साल के बच्चे की हत्या के मामले में सेवानिवृत्त शिक्षक को चार साल के लिए जेल भेज दिया। अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम के विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र कुमार की अदालत ने बहेड़ा थाना क्षेत्र के कन्हौली गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक ज्ञानी मंडल को चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला घटना के 18 साल बाद आया, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिला।

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2007 में हुई थी निर्मम हत्या
जानकारी के मुताबिक, घटना 27 जून 2007 की है, जब कन्हौली गांव में बकरी चरा रहे सात वर्षीय सिकंदर राम को सेवा निवृत्त शिक्षक ज्ञानी मंडल ने बांस के डंडे से बेरहमी से पीटा था। इस पिटाई में बकरी और बच्चा दोनों की मौत हो गई थी। मृतक के पिता उपेन्द्र राम ने इस घटना के बाद बहेड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
 
धारा 302 के तहत हुआ था केस दर्ज
इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 429 (पशु को नुकसान पहुंचाने) और अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम की धारा 3(1)(10) के तहत बहेड़ा थाना कांड संख्या 191/07 दर्ज किया था। मामला दरभंगा व्यवहार न्यायालय में जीआर केस नंबर 289/12 के तहत विचाराधीन था।
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अदालत ने 18 साल बाद सुनाया फैसला
इस मामले की सुनवाई 18 फरवरी 2025 को पूरी हुई, जिसमें अदालत ने आरोपी ज्ञानी मंडल को गैर इरादतन हत्या (धारा 304(2)) में दोषी करार दिया। दोष सिद्ध होने के बाद अदालत ने आरोपी को तुरंत हिरासत में लेने का आदेश दिया।
 
चार साल की सजा सुनाई गई
सोमवार को विशेष एससी-एसटी कोर्ट में अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम बहस के बाद न्यायाधीश शैलेन्द्र कुमार ने ज्ञानी मंडल को चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में अभियोजन पक्ष का संचालन स्पेशल पीपी संजीव कुमार कुंवर ने किया।
 
इस फैसले के बाद मृतक बच्चे के परिवार को 18 साल बाद न्याय मिला, लेकिन इतने लंबे समय तक चले मुकदमे को लेकर पीड़ित परिवार ने न्याय प्रक्रिया की धीमी गति पर भी नाराजगी जताई। वहीं, आरोपी के परिजन फैसले से असंतुष्ट हैं और उच्च न्यायालय में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं।

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