राज्यपाल सैयद अता हसनैन पहुंचे दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय
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बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन बुधवार को दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय पहुंचे, जहां कुलपति लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने मिथिला की पारंपरिक रीति के अनुसार पाग, चादर और मखाना की माला पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया। राज्यपाल पहली बार विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक में शामिल हुए, जहां उनकी मौजूदगी में विश्वविद्यालय का बजट पारित किया जाना प्रस्तावित है।
राज्यपाल के आगमन से पहले मंगलवार को विश्वविद्यालय में वेतन और पेंशन भुगतान में देरी को लेकर कर्मचारियों और पेंशनधारियों ने आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया था। लंबे समय से लंबित भुगतान और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी देखी जा रही है।
बताया जा रहा है कि यह पहला अवसर है, जब बिहार के राज्यपाल स्वयं संस्कृत विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक में शामिल हुए हैं। इस बीच कुलपति के खिलाफ कई शिकायतें भी सामने आई हैं। बेनीपुर के जदयू विधायक विनय चौधरी ने आरोप लगाया था कि यह राज्य का पहला विश्वविद्यालय है, जहां परीक्षा पास करने के बाद भी छात्रों को समय पर अंक पत्र नहीं दिया जा रहा है। साथ ही, सरकार द्वारा 178 करोड़ रुपये का आवंटन किए जाने के बावजूद शिक्षकों और पेंशनधारियों को भुगतान नहीं हो रहा है।
अभी काफी काम बाकी हैं- राज्यपाल
पत्रकारों से बातचीत में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा कि वे पहले भी दरभंगा आ चुके हैं और यहां दोबारा आने की इच्छा रखते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभी काफी काम बाकी है और वे सभी विश्वविद्यालयों की स्थिति का लगातार विश्लेषण कर रहे हैं, जहां कुलपति अपने-अपने मुद्दे उनके सामने रख रहे हैं।
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राज्यपाल ने सीनेट की नियमित बैठकों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि समस्याओं को गहराई से समझकर ही ठोस समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन, सरकार और मीडिया के सहयोग से शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव संभव है। साथ ही, उन्होंने दरभंगा में संस्कृत विश्वविद्यालय की मौजूदगी को गर्व की बात बताते हुए इसके विकास के लिए हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन दिया।