दरभंगा व्यवहार न्यायालय की अपर सत्र न्यायाधीश नागेश प्रताप सिंह की अदालत ने हत्या और शव छिपाने के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए आठ वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अशोक पेपर मिल पुलिस स्टेशन क्षेत्र के परमार गांव निवासी स्वर्गीय कामो मांझी के पुत्र रवीन्द्र मांझी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत आठ वर्ष कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
शव छिपाने के आरोप में भी सुनाई सजा
इसके अलावा अदालत ने शव छिपाने के आरोप में धारा 201 के तहत दो वर्ष कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में तीन माह अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
वर्ष 2022 की है घटना
यह घटना 23 दिसंबर 2022 की है, जब परमार गांव निवासी नागे सदा खेत में पटवन करने गए थे। इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई और शव को लक्ष्मीनिया पोखर में फेंक दिया गया था। इस मामले में मृतक के पुत्र रामभरोस सदा ने अशोक पेपर मिल पुलिस स्टेशन में कांड संख्या 239/22 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनके पिता खेत पटवन के लिए गए थे, लेकिन वापस घर नहीं लौटे। बाद में पुलिस ने आरोपी के बताए स्थान से तालाब से शव बरामद किया।
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सात गवाहों की हुई गवाही
इस मामले की सुनवाई सत्रवाद संख्या 289/23 के तहत शुरू हुई। 10 अप्रैल 2023 को अदालत में आरोपी के विरुद्ध आरोप तय किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल सात गवाहों की गवाही कराई गई। अभियोजन पक्ष का संचालन कर रहे अपर लोक अभियोजक अरुण कुमार सिंह ने अदालत में पक्ष रखा। अदालत ने 9 फरवरी को सुनवाई पूरी कर आरोपी को दोषी घोषित कर दिया था और सजा के निर्धारण के लिए 10 मार्च की तिथि तय की गई थी। उल्लेखनीय है कि दोषसिद्ध आरोपी 28 दिसंबर 2022 से ही जेल में बंद है।