दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के नगर पंचायत भरवाड़ा बाजार में एक महिला रीता देवी की मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए शव को चिता के पास करीब सात घंटे तक इंतजार करना पड़ा। अंतिम संस्कार रोके जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। तनाव की स्थिति को देखते हुए मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। काफी मशक्कत के बाद सीओ नेहा कुमार और सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष बसंत कुमार के हस्तक्षेप से शव का अंतिम संस्कार कराया जा सका।
जमीन को लेकर हुआ विवाद
बताया जाता है कि जिस जमीन पर अंतिम संस्कार किया जा रहा था, उसे लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। एक पक्ष का दावा है कि जमीन उनके पूर्वजों ने वर्ष 1949 और 1953 में खरीदी थी तथा उनके पास 1972 के खतियान, 2010 के केबाला सहित ऑनलाइन-ऑफलाइन जमाबंदी और अन्य सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद दूसरे पक्ष ने जमीन को अपनी बताते हुए अंतिम संस्कार रोक दिया।
पटना में इलाज के दौरान हुई थी महिला की मौत
भरवाड़ा निवासी अनंत गुप्ता की 60 वर्षीय पत्नी रीता देवी का निधन पटना के एक अस्पताल में इलाज के दौरान हो गया था। शव गांव पहुंचते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। मृतका के पुत्र नारायण कुमार और कृष्ण मुरारी ने बताया कि अंत्येष्टि के लिए उपले आदि की व्यवस्था कर शव को भरवाड़ा दिग्घी पोखर के पास ले जाया गया।
अंत्येष्टि शुरू होते ही जमीन विवाद को लेकर हुआ हंगामा
परिजनों के अनुसार, अंत्येष्टि के लिए उनकी निजी भूमि पर गड्ढा बनाया जा रहा था। इसी दौरान गांव के भागेंद्र यादव, कौशल यादव समेत अन्य लोग मौके पर पहुंचे और जमीन को अपनी बताते हुए अंतिम संस्कार करने से रोक दिया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां जुट गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। अंतिम संस्कार रोके जाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच जमकर हंगामा हुआ।
पुलिस और सीओ ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष बसंत कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। वहीं सीओ नेहा कुमारी ने घटनास्थल पर पहुंचकर दोनों पक्षों से जमीन संबंधी कागजात की जानकारी लेना शुरू किया। ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश और जमीन के दस्तावेजों की जांच के बाद करीब सात घंटे बाद शव का अंतिम संस्कार कराया जा सका।
दूसरे पक्ष ने भी जमीन पर जताया दावा
वहीं अंतिम संस्कार रोकने वाले रामेश्वर यादव ने बताया कि यह जमीन उनके दादा ने वर्ष 1974 में खरीदी थी और उस पर उनका कब्जा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका परिवार करीब 20 वर्षों से गांव से बाहर रह रहा था, जिसका फायदा उठाकर दूसरे पक्ष ने गलत तरीके से जमीन के कागजात तैयार करवा लिए। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले भी उनकी अनुपस्थिति में इसी जमीन पर अन्य लोगों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है।
मृतका के पुत्र ने पुराने अंतिम संस्कार का दिया हवाला
मृतका के पुत्रों ने बताया कि उसी जमीन पर उनके दादा का भी अंतिम संस्कार हुआ था और वहां उनका स्मारक भी बना हुआ है। उनका कहना था कि जैसे ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई, आरोपित पक्ष ने पहुंचकर काम रुकवा दिया।
ये भी पढ़ें:
जिस बेटी की उठनी थी डोली, उसकी उठी अर्थी; जयमाला के स्टेज पर दुल्हन की मौत, फिर सामने आई दर्दनाक सच्चाई
जांच के लिए दोनों पक्षों को बुलाया गया
सीओ ने बताया कि फिलहाल अंत्येष्टि का कार्य पूरा करा लिया गया है। दोनों पक्षों को जमीन संबंधी सभी दस्तावेजों के साथ अंचल कार्यालय में बुलाया गया है। दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं थानाध्यक्ष बसंत कुमार ने भी बताया कि अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण ढंग से करा दिया गया है और दोनों पक्षों को कागजात के साथ सीओ कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।