राजद के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अध्यक्ष मो. अली अशरफ फातमी
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने राज्य के मुस्लिम समुदाय के लिए कोई ठोस काम नहीं किया, बल्कि उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद से मुस्लिम समुदाय के हित में कई अहम कदम उठाए हैं, जिनमें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के बजट में भारी वृद्धि शामिल है।
वहीं, मुख्यमंत्री के इस बयान पर राजद के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अध्यक्ष सह पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री मो. अली अशरफ फातमी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ‘वक्फ बिल’ पास हुआ है, जिसमें नीतीश कुमार ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और पार्टी के एक सांसद ने खुद कहा था कि “जब मुसलमान हमें वोट नहीं करते तो हम उनके लिए काम क्यों करें?” अब वही नीतीश कुमार कह रहे हैं कि उन्होंने मुसलमानों के लिए काफी काम किया है और उनसे वोट मांग रहे हैं।
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फातमी ने यह भी कहा कि इस बार के टिकट बंटवारे ने जदयू की मानसिकता साफ कर दी है। पहले के चुनावों में जदयू में मुसलमानों की भागीदारी अधिक होती थी, लेकिन भाजपा के साथ गठबंधन में आने के बाद उनका झुकाव मुस्लिम समुदाय से कम हो गया है। फातमी ने कहा कि एनडीए गठबंधन की भाजपा ने इस बार एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया, जबकि जदयू ने केवल चार मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। यह स्पष्ट संकेत है कि उन्हें मुस्लिम वोटों की परवाह नहीं रह गई है।