नवरात्र में पूजा का यहां खास महत्व है।
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नवादा दुर्गा स्थान 52 सिद्ध पीठों में से एक है
सिंहासन का रूप कान के आकार का है। वहीं इस सम्बंध में डॉक्टर चंद्रमणि झा का कहना है कि नवादा दुर्गा स्थान 52 सिद्ध पीठों में से एक है। इस पीठ का वर्णन देवी भागवत पुराण व मत्स्य पुराण में भी किया गया है। मंदिर के पुजारी अमरनाथ ठाकुर का कहना है जो सच्चे मन से मां भगवती की पूजा अर्चना करते हैं उनको मनवांछित फल मिलता है। पूजा को लेकर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। इस इलाके के लोगों का कहना है कि सैकड़ों वर्ष पहले राजा हयहठ ने मां जगदंबा की मूर्ति स्थापित की थी। इसलिए इस मंदिर का नाम माता हयहठ सिद्धपीठ मंदिर पड़ा।