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Bihar: दरभंगा में युवक ने बुलंद हौसलों के बदौलत लगाया कपड़ा उद्याेग, गांव के 60 लोगों को मिला रोजगार

Mon, 07 Aug 2023 06:12 PM IST
लोकेंद्र सिंह चंपावत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा

सार

दरभंगा जिले के केवटी थाना क्षेत्र के रनवे निवासी एक युवक ने अपने बुलंद हौसलों के बदौलत कपड़ा उद्याेग लगा दिया। जिसकी बदौलत गांव के 60 लोगों को रोजगार दिया। युवक का नाम मुकेश लाल है, जो पेशे से टेक्सटाइल इंजीनियर है। 
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गांव में लगाया कपड़ा उद्योग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार के दरभंगा जिले के केवटी थाना क्षेत्र के रनवे निवासी एक युवक ने अपने आप को एक अलग ही रूप में स्थापित किया है। युवक मुकेश लाल जो पेशे से टेक्सटाइल इंजीनियर है। उसने अपने हौसलों के बदौलत अपने ही गांव में कपड़ा उद्योग की फैक्ट्री लगाकर 60 लोगों को नौकरी देने का काम किया है। इसमें आधे से अधिक महिलाएं हैं, जो रोजगार पा रही हैं।

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गांव वालों को रोजगार देने वाले मुकेश की कहानी
बता दें कि, केवटी प्रखंड के केवटी रवने निवासी 38 साल के मुकेश लाल है, जिनका विजन जॅाब सिकर नहीं, बल्कि जॅाब मेकर बनने का है। मुकेश ने टेक्सटाइल हब लुधियाना, गुरुग्राम, सूरत और बैंगलोर की कई बड़ी कपड़ा कंपनियों में काम किया है। यहां के कपड़ा कंपनियाें में दरभंगा व मुधबनी के अधिकांश महिला और पुरुष काम करते देखे जाते थे। उनकी परेशानी, लाचारी और घर-परिवार छाेड़कर पलायन की पीड़ा काे देखते हुए टेक्सटाइल इंजीनियर का पद छाेड़ गांव में ही आकर स्वयं का कपड़ा उद्याेग खाेलने का निर्णय लिया। उन्हाेंने कहा कि बिहार के मजदूराें का पलायन राेकने के लिए यह फैसला लिया। उनका यह निर्णय बेहतर साबित हो रहा है। 

2019 में गांव आकर पिता की सहमति से महज 10 मजदूराें के बलबूते करीब 20 से 25 लाख रुपये लगाकर कपड़ा उद्याेग खड़ा किया था। उनकी कंपनी का नाम SMV गार्मेंट है। कड़ी मेहनत की बदाैलत आज उनकी कंपनी में 50 से 60 मजदूर काम कर रहे हैं। इसमें 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। उनका सालाना टर्न ओवर करीब एक कराेड़ रुपये हाे गया है। फिलहाल उनकी कंपनी में शर्ट व ब्लेजर बनाए जाते हैं। गुरुग्राम की एक कंपनी से टाइअप कर जिंस बनाया जाता है। उनकी कंपनी में तैयार शर्ट व ब्लेजर का मार्केट दरभंगा, मधुबनी, पटना के अलावा बेंगलोर, चेन्नई, सेलम आदि शहराें में है।
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मुकेश के बताया कि यहां मजदूराें की कमी नहीं है। उनकी इच्छा है कि इस क्षेत्र से 75 से 80 प्रतिशत मजदूराें काे रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़े। मजदूराें की संख्या 200 से 250 करने की याेजना है। सालाना टर्नओवर 5 से 6 कराेड़ करने का लक्ष्य है। शर्ट व ब्लेजर के अलावा टी-शर्ट व जिंस पैंट बनाने की तैयारी चल रही है। मुकेश ने बताया कि उन्हाेंने 2012 में दिल्ली में निफ्ट से टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। 

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