अगर आपका मोबाइल गुम हो जाय या चोरी हो जाय तो आप एक बड़ी समस्या से घिर सकते हैं। साईबर थाना में दर्ज किए दो मामलों में इस बात का खुलासा हुआ है। जानिए मोबाइल चोरी होने के बाद आप कैसे हो सकते हैं कंगाल और क्या हैं इससे बचने के तरीके। पटना रेल साइबर थाने की पुलिस ने साइबर अपराधियों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए दो सहोदर भाईयों और एक नाबालिक सहित चार साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। साइबर पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गये अपराधी मामूली अपराधी नहीं हैं बल्कि अंतर्राज्यीय गिरोह के सदस्य हैं और ये दोनों भाई इसके सरगना हैं। पूछताछ के दौरान इनकी पहचान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा के मानपुर गिरीयक निवासी रविंद्र चौधरी उसके भाई दिनेश कुमार, नवादा निवासी अमर कुमार वर्मा और अगम कुआं का रहने वाला एक नाबालिग दसवीं का छात्र है।
इनके पास से हुआ बरामद
पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किए जाने के दौरान इन अपराधियों के पास से पुलिस ने एक देशी पिस्तौल, 14 बैंक पासबुक, एक चेक बुक, 22 एटीएम कार्ड, 11 आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, एक QR कार्ड, एक पेमेंट बैंकिंग मशीन, एक पे-फोन मशीन और 4 मोबाइल फोन बरामद किया है।
ऐसे लूटते हैं साईबर अपराधी
साईबर पुलिस ने खुलासा करते हुए बताया कि साइबर अपराधी अपने इस काम में नाबालिक बच्चों का इस्तेमाल करते हैं। यह बच्चे पटना सहित अन्य स्टेशनों पर ट्रेन पर चढ़ने और उतरने के क्रम में यात्रियों के मोबाइल चुराकर साइबर फ्रॉड के हवाले कर देते हैं। इसके बदले में उन्हें 500 से 1000 रुपया तक तत्काल मिल जाता है। फिर साइबर फ्रॉड मोबाइल के लॉक को तोड़कर उसके खाते से रुपया निकालकर दूसरे अकाउंट में पैसा भेज देते हैं।
दो घटना से हुआ मामला उजागर
पहली घटना 23 जुलाई की है जब सीवान निवासी वाजिद हुसैन किसी काम से पटना आये थे, लेकिन ट्रेन से उतरने के क्रम में सरगना के सबसे छोटे अपराधी ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मोबाइल चोरी कर लिया। वाजिद ने अपने उस नंबर को दोबारा चालू करवाया। मोबाइल चालु होते ही मोबाइल पर आने वाले मेसेज ने उन्हें चौंका दिया। इस मेसेज से यह स्पष्ट हुआ कि उनके बैंक अकाउंट से साइबर अपराधियों ने तीन लाख चार हजार तीन सौ सात रुपये की निकासी कर लिए हैं। वाजिद ने रेल थाना में मामला दर्ज करवाया।
दूसरी घटना
रेलवे साइबर थाने में दूसरी घटना 17 अगस्त को दर्ज किया गया जिसके अनुसार अरुण कुमार साह 10 अगस्त को कटिहार जाने के लिए राजेंद्र नगर टर्मिनल आए थे। इसी क्रम में उनका मोबाइल चुरा लिया गया। जब दुबारा नंबर चालू हुआ तो उनके पैर के नीचे से जमीन खिसक गई। उनके खाते से ₹90,000 निकल चुके थे। जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि उनके खाते से वह रुपये अरुण कुमार के खाते में जा चुके थे। पुलिस ने तुरंत उसे गिरफ्तार कर लिया। अरुण कुमार की निशानदेही पर पुलिस ने पटना अगम कुआं से नाबालिग को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।
कहां कहां रुपयों का हुआ ट्रांसफर
वाजिद के खाते से उत्तर प्रदेश के खुशी यादव के खाते में दो बार में ₹1,98,000 और रायपुर के दीपेश्वर के खाते में ₹99,000 का ट्रांसफर हुआ। फिर वह रुपया खुशी यादव के अकाउंट से निकलकर नालंदा के रविन्द्र चौधरी के खाते में भेजा गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रविंद्र और उसके भाई दिनेश को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही दीपेश्वर के खाते को फ्रीज कर दिया।
अंतर्राज्यीय गिरोह संचालित करते हैं
रेलवे साइबर पुलिस का कहना है कि रविंद्र और दिनेश साइबर फ्रॉड का अंतर्राज्यीय गिरोह संचालित करते हैं। इसके गिरोह में उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के अपराधी शामिल हैं। साईबर अपराधियों ने कई राज्यों में फर्जी डॉक्यूमेंट पर खाता खुलवा रखे हैं जिसका इस्तेमाल ठगी के रुपये ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। उत्तर प्रदेश के खुशी यादव और रायपुर के दीपेश्वर के संबंध में दोनों राज्यों की पुलिस ने जानकारी मांगी गई है।
ऐसे बचाएं अपने अकाउंट को लूट जाने से
रेल साईबर थाना के प्रभारी डीएसपी सुशांत कुमार चंचल का कहना है कि साइबर अपराधियों के पास चोरी का मोबाइल पहुंचते ही सबसे पहले येलोग मोबाइल का लॉक तोड़ते हैं। लोग अक्सर अपने मोबाइल में आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंकों का ऑनलाइन खाता का अकाउंट नंबर और पिन नंबर सेव रखते हैं। साईबर अपराधी आधार कार्ड, पैन कार्ड और मोबाइल नंबर की मदद से खाते से लिंक करते हुए यूपीआई अकाउंट बनाकर मोबाइल धारक का पूरा अकाउंट खाली कर देता है। रेल डीएसपी का कहना है कि यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है।
यह जरुर करें
अमर उजाला आपसे अपील करता है कि मोबाइल में आधार कार्ड और पैन कार्ड की तस्वीर नहीं रखें। पासवर्ड या अकाउंट नंबर लिखकर नहीं रखें। मोबाइल गुम या चोरी होने पर तत्काल सिम को ब्लॉक करवाएं। साथ ही 1930 पर इस घटना की तत्काल सूचना दें।