बाढ़ के मरांची गांव में मवेशी कारोबारी रामप्रवेश सिंह की हत्या के बाद परिवार आर्थिक संकट में है। पत्नी ने जनप्रतिनिधियों पर मदद नहीं करने का आरोप लगाया है। परिजनों ने सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और फांसी की सजा की मांग की है।
बाढ़ अनुमंडल के मरांची गांव में मवेशी कारोबारी रामप्रवेश सिंह की हत्या के बाद उनका परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। मृतक का परिवार एक कमरे के जर्जर कर्कट के घर में रहने को मजबूर है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है, जबकि घर के दरवाजे पर करीब एक फीट पानी जमा है।
परिजनों के अनुसार, रामप्रवेश सिंह 18 सितंबर की शाम करीब सात बजे घर से निकले थे। इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई। करीब 36 घंटे बाद गांव से पकड़े गए एक आरोपी की निशानदेही पर उनका शव गांव के पास एक बगीचे में बांस के पत्तों से ढका हुआ मिला। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है।
परिजनों ने पुलिस से सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी कर उन्हें फांसी की सजा दिलाने की मांग की है। परिवार का कहना है कि रामप्रवेश ही घर में कमाने वाले अकेले व्यक्ति थे। उनकी मौत के बाद पत्नी मीणा देवी, बेटा शिवम कुमार और बेटी के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
परिजनों के मुताबिक, शिवम 12वीं कक्षा में पढ़ता है, जबकि उसकी बहन आठवीं कक्षा की छात्रा है। उनकी मां गृहिणी हैं। पड़ोसी अभिमन्यु कुमार ने बताया कि परिवार बेहद गरीबी में जीवन गुजार रहा है। उनके पास रहने के लिए पक्की छत और जमीन तक नहीं है। पड़ोसी का दावा है कि परिवार का राशन कार्ड भी नहीं बना है।
मृतक की पत्नी मीणा देवी ने कहा कि पति की हत्या के बाद अभी तक उन्हें किसी जनप्रतिनिधि से मदद नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि स्थानीय मुखिया, विधायक या अन्य जनप्रतिनिधि उनसे मिलने तक नहीं पहुंचे। स्थानीय विधायक अनंत सिंह को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई। मीणा देवी ने कहा कि उनका पूरा परिवार अनंत सिंह का झंडा थामे रहता है, इसके बावजूद वह उनसे मिलने नहीं पहुंचे।
उन्होंने स्थानीय विधायक अनंत सिंह और लखीसराय विधायक विजय सिन्हा से सवाल किया कि अगर वह अब सड़क पर निकलकर भीख मांगने को मजबूर होती हैं तो क्या उन्हें यह अच्छा लगेगा। उन्होंने सभी आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की है।
मृतक के बेटे शिवम कुमार ने बताया कि उनके पिता को शुक्रवार शाम करीब सात बजे दीपक और बबलू बुलाकर ले गए थे। सुबह जब उन्होंने फोन किया तो आरोपियों ने उनके पिता के साथ नहीं होने की बात कही। इसके बाद शनिवार को थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। परिजनों ने आरोपी के पिता मंगल भगत को पकड़कर पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने उससे पूछताछ की, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर रामप्रवेश का शव बगीचे से बरामद किया गया।
शिवम ने बताया कि उन्हें अभी तक यह जानकारी नहीं है कि उनके पिता की हत्या क्यों की गई। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है।
ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि कुछ दिन पहले राजेश नगर से एक भैंस खुलकर मरांची गांव आ गई थी। बताया जा रहा है कि दीपक, रंजीत और रामप्रवेश ने मिलकर उस भैंस को 90 हजार रुपये में बेच दिया था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि रुपये किसके पास थे। भैंस के असली मालिक को रुपये लौटाने को लेकर विवाद होने की बात भी सामने आ रही है।
परिजनों के अनुसार, 18 सितंबर को रामप्रवेश आरोपियों के साथ गए थे और वहां सभी ने शराब पी थी। शव मिलने वाली जगह से कुछ दूरी पर शराब की बोतलें भी पड़ी मिलीं। वहीं, आरोपी रंजीत का शव घटना के बाद हाथीदह और रामपुर डुमरा जंक्शन के बीच रेलवे पटरी पर क्षत-विक्षत अवस्था में मिला था। पूरे मामले की पुलिस जांच कर रही है।
पड़ोसी अभिमन्यु कुमार ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि रामप्रवेश को बुलाकर ले जाने के बाद उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने बताया कि मृतक परिवार का इकलौता कमाने वाला व्यक्ति था। परिवार के पास न पक्की छत है और न ही जमीन। हल्की बारिश में भी घर के आंगन में पानी जमा हो जाता है और कर्कट की छत से पानी टपकता है। उनका आरोप है कि घटना के बाद स्थानीय विधायक या कोई अन्य जनप्रतिनिधि परिवार से मिलने नहीं पहुंचा।