कोरोना से मौत के बाद मृतक के घर पसरा सन्नाटा
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गांवों में कोरोना से त्राहिमाम की स्थिति
राम नगर में ज्वेलरी दुकान चलाने वाले गोपाल सोनी ने भी मुजफ्फरपुर अस्पताल में कोरोना की वजह से आखिरी सांस ली। गोपाल साह के परिवार वालों ने बताया कि प्रदेश से उनके मित्र पिछले सप्ताह आए थे, उनसे मिलने वह घर गए। इसके बाद अपने घर लौटे तो वह खांसी और बुखार से ग्रसित थे। हम लोग सही समय पर नहीं जान पाए। जब जांच कराई तो पता चला कि उनके 80 फीसदी फेफड़े संक्रमित हो चुके थे, जिससे बचा पाना मुश्किल था।
औराई प्रखंड के सुंदरखउल्ली गांव के वकील मनोज कुमार से जब गांवों में कोरोना के बारे में पूछा तो उन्होंने कोरोना पर दुखभरी कहानी सुनानी शुरू कर दी। मनोज के मुताबिक ब्लॉक के कई गांवों में त्राहिमाम की स्थिति है। दुकानदार आपदा में अवसर तलाश रहे हैं। मेडिकल स्टोर पर थर्मामीटर, ऑक्सीमीटर समेत अन्य दवाओं की काफी कमी है। मैंने पूछा कि क्या इसकी कालाबाजारी भी हो रही है तो उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया उन्होंने कहा कि दुकानदार और दलालों की तालमेल से इसकी कालाबाजारी जमकर हो रही है। वकील मनोज ने टीकाकरण पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ब्लॉक स्तर पर टीकाकरण पूरी तरह से फिसड्डी है।
मृतक गोपाल सोनी के घर में मातम का माहौल
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कोरोना की बढ़ती रफ्तार पर ग्रामीणों के अपने-अपने दावे
जिले से करीब 50 किलोमीटर दूर औराई प्रखंड के रतवारा बिंदवारा गांव के पूर्व पोस्ट मास्टर राजबली झा ने कहा कि कोरोना संक्रमण को गांवों तक फैलने में प्रवासी मजदूरों के साथ-साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकारी लापरवाही भी उजागर हो रही है। आज ब्लॉक के स्वास्थ्य केंद्रों में पैरासिटामॉल टेबलेट तक उपलब्ध नहीं है, तो फिर कोरोना से लड़ाई की बात केवल बेमानी है, लेकिन उसी गांव के अपूर्व नारायण झा पूर्व पोस्टमास्टर साहब की बात से सहमत नहीं दिखे। उन्होंने जनता को ही कोरोना फैलाने का जिम्मेदार माना। अपूर्व नारायण ने कहा कि लोगों ने मास्क नहीं लगाया, सोशल डिस्टेंसिंग नहीं रखी और जब संक्रमण फैल गया तो सारा ठीकरा सरकार पर फोड़ रहे हैं।
मैं तो यहां तक कहूंगा कि इतनी बड़ी आबादी के बावजूद भी सरकार ने हर गांव में वैक्सीन भिजवाई, लेकिन अफवाहों की वजह से ग्रामीणों ने वैक्सीन नहीं लगवाई, डॉक्टर केवल दवा लिखता है और दवा मरीज को खानी होती है। मरीज दवा नहीं खाए तो इसमें डॉक्टर क्या कर सकता है। ऐसे में सरकार ने इस लड़ाई में पूरी कोशिश की, लेकिन हम सरकार का साथ नहीं दे रहे हैं।
इसी गांव की क्योला देवी बताती हैं कि इस समय शहर से भी ज्यादा गांव की हालत खराब है, क्योंकि गांव में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा का भारी अभाव है। गांव में स्वास्थ्य केंद्र का भवन तो बहुत पहले निर्माण हो गया, लेकिन आज तक उसमें ना तो डॉक्टर बैठते हैं और ना नर्स। पूरा भवन वीरान पड़ा रहता है।
नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार
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अस्पताल से स्वस्थ होकर लौटे मुशहरी प्रखंड के महमदपुर कोठी के रहने वाले अजय कुमार से जब हमने कोरोना को मात देने के बारे में पूछा तो उन्होंने मुस्कुरा कर कहा कि जाको राखे साइयां मार सके ना कोई..अजय कुमार ने कहा कि अस्पताल का सिस्टम भी भगवान भरोसे था और हमने सिस्टम को देखकर खुद भी भगवान भरोसे कर लिया। हमारे सामने ही कई लोगों ने दम तोड़ दिया..बस ईश्वर की कृपा है कि हम स्वस्थ होकर घर लौट आए।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के लिए सरकार जिम्मेदार-ग्रामीण
मुजफ्फरपुर से 40 किलोमीटर दूर स्थित कुढ़नी ब्लॉक के बलड़ा गांव के युवा को वीडियो कॉल किया। पीपल पेड़ के नीचे चार पांच युवा पत्ते खेल रहे थे.. हालचाल के बाद 45 साल के युवा संजय कुमार से जब मैंने पूछा कि कोरोना की सबसे बड़ी वजह आप किसे मानते हैं, तो इस पर वहां मौजूद युवाओं ने एक सुर में कहा कि सरकार इसके लिए जिम्मेदार है, मैंने पूछा कैसे तो संजय कुमार ने बताया कि बिना टेस्टिंग के प्रवासी मजदूरों को गांव में आने की इजाजत दे दी गई इसलिए कोरोना संक्रमण इतनी तेजी से फैल रहा है।
दूसरे युवा अजीत कुमार ने बताया कि हमारे गांव की आबादी करीब 300 है जिसमें 150 लोग बाहर रहते हैं, जैसे-जैसे प्रदेश में रहने वाले लोग गांव आने लगे वैसे ही कोरोना गांवों में पांव पसारने लगा। आज स्थिति ये है कि गांव के 35 से 40 लोग सर्दी, बुखार खांसी से गुजर रहे हैं। ज्यादातर लोगों ने माना कि बिहार में स्वास्थ्य की लचर व्यवस्था इस संक्रमण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है।
कोरोना के गांवों तक पहुंचने के पीछे लोगों ने प्रशासन की सुस्त रवैये को भी माना है। स्थानीय निवासी और किराना दुकान चलाने वाले नूनू बाबू ने बताया कि जिस वक्त प्रवासी मजदूर अपने घर लौट रहे हैं थे उसी वक्त सरकार को ट्रैकिंग और टेस्टिंग पर जोर देने की जरूरत थी। सरकारी अधिकारी उस वक्त इस पर ध्यान नहीं दिए और अब जब पानी सर से ऊपर निकल चुका है तब अफसर ट्रैकिंग और टेस्टिंग करा रहे हैं।
कोरोना की दूसरी लहर ने मचाई तबाही
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प्रशासन की ओर से उठाए जा रहे जरूरी कदम
ग्रामीणों के आरोप और दावों के बाद अमर उजाला वेबसाइट ने जिला जनसंपर्क अधिकारी कमल सिंह से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण कम करने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। हां यह जरूर है कि पिछले एक हफ्ते से ग्रामीण इलाकों से भी कोरोना मरीज आ रहे हैं। मरीज जिस संख्या में आ रहे हैं उस अनुपात में उन्हें स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिली पाई होगी, लेकिन जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से संक्रमित मरीजों को कोविड डेडिकेटेड अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है। जिले के 16 प्रखंड के 1811 गांवों में आंगनबाड़ी और जीविका दीदियों की मदद से मास्क लगाने, स्वच्छता अपनाने और सेनेटाइजर इस्तेमाल करने की अपील की जा रही है। प्रखंड विकास अधिकारियों द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
इसके अलावा पूर्वी अनुमंडल बेला में महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज और पश्चिमी अनुमंडल पोखरैरा में टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर को क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है, जहां पर कोरोना मरीजों को रखा जा रहा है। मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांवों पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया है। जिले में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सदर अस्पताल मुजफ्फरपुर में ऑक्सीजन प्लांट की शुरुआत की गई है। जिले में हर रोज 1800 से 2000 सिलेंडर की सप्लाई की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के मुताबिक यहां से ऑक्सीजन की सप्लाई आसपास के जिलों में भी की जा रही है।
कोरोना की रिकवरी रेट हुई कम
राज्य में पिछले एक सप्ताह में कोरोना संक्रमण में 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य में कोरोना की रिकवरी रेट 79.16% है। जो पहले के मुकाबले कम हो गई है। अभी तक 464025 लोग ठीक होकर घर लौट चुके हैं। बिगड़ते हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी जिलों में आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी विभागों को बंद करने का निर्देश दिया है।