ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयान में दस वर्ष की एक पीड़िता ने कहा कि सूरज के ढलते ही बालिका गृह की लड़कियों के बीच दहशत फैल जाती थी। रातें आतंक की तरह बीतती थीं। दस वर्षीय एक और पीड़िता ने बताया कि कहना नहीं मानने वाली लड़कियों की वह डंडों से पिटाई करता था। 14 साल की एक अन्य पीड़िता ने बताया कि बृजेश के बालिका गृह आते ही कई लड़कियां तो डर से कांपने लग जाती थीं। उसे हंटरवाला अंकल कहा जाता था।
विरोध करने पर हाथ पांव बांध दिए जाते थे
कोर्ट के सामने 7 साल की एक पीड़िता ने बताया कि रेप के दौरान उसके हाथ पैर बांध दिए जाते थे। विरोध करने पर 3 दिन तक भूखा रखा जाता था और बेरहमी से पिटाई होती थी। बृजेश ठाकुर से माफी मांगने और उसके सामने सरेंडर करने पर ही खाना दिया जाता था। 7 साल की एक लगभग गूंगी पीड़िता ने बताया कि उसे 2 दिन भूखा रखा गया और वह हार गई। उसके साथ लगातार प्रताड़ना और रेप के बाद वह कई दिनों तक चलने-फिरने के काबिल नहीं रही।
पीड़िताओं ने बताया था कि उनकी कई साथियों को रात में बाहर ले जाया जाता था और वह अगले दिन वापस लाई जाती थी। बाहर जाने वाली पीड़िताओं को नहीं पता होता था कि कि उन्हें कहां ले जाया जाता था। 11 साल की एक पीड़िता ने अपने बलात्कारी की पहचान तोंदवाले अंकल के रूप में की थी, तो दूसरी ने उसी अपराधी की पहचान बताते हुए कहा कि वह मूंछवाला भी था।
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पीडिताओं ने बताया था जब वह तोंदवाला और मूंछवाला नेताजी वहां होते थे तो किसी को भी रूम में आने की इजाजत नहीं होती थी। पीडिता ने कोर्ट को बताया कि वहां काम करने वाली किरण बच्चियों की शिकायत को बार-बार नजरअंदाज कर देती थी। वहीं दूसरी कर्मचारी नेहा के बारे में सात साल की पीड़िता ने बताया कि ऐसी शिकायत करने पर वह बुरी तरह प्रताड़ित करती थी। किरण और नेहा को भी मामले में 10 आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया गया है।
केस दर्ज होने के बाद भी मिला प्रोजेक्ट
मुजफ्फरपुर बालिका गृह में हुई शर्मनाक घटना के बाद अब इसे चलाने वाली एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति को एक और सरकारी प्रोजेक्ट आवंटित किए जाने का मामला सामने आया है। बता दें कि स्टेट वेलफेयर डिपार्टमेंट ने मुंबई की संस्था टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइसेंस द्वारा यह प्रोजेक्ट दिया गया है। खास बात यह है कि बालिका गृह में यौन शोषण की रिपोर्ट सौंपने के एक महीने बाद यह प्रोजेक्ट आवंटित किया गया है।
बच्चियों को लगाए जाते थे मिर्गी के इंजेक्शन, मिलीं 63 प्रकार की दवाएं
बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बालिका गृह में बच्चियों के साथ यौन शोषण के मामले में रोज नए खुलसे सामने आ रहे हैं। बच्चियों के इलाज के नाम पर बालिका गृह में एक कमरा बना हुआ था। जिसपर कल पुलिस ने छापेमारी की है। छापेमारी के दौरान यहां से 63 प्रकार की दवाएं मिली हैं। जिन्हें जब्त कर लिया गया है। जानकारी के मुताबिक दुष्कर्म से पहले बच्चियों को मिर्गी के इंजेक्शन लगाकर बेहोश कर दिया जाता था।
मामले में आईजी और डीआईजी ने कमरा देखने के बाद इसकी एफएसएल और डॉक्टरों को जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कमरे में रखे सभी सामानों की जांच की गई। कमरे में अलमारी और बक्से भी मौजूद थे। इस दौरान 63 तरह की दवाएं मिलीं। दवाइयों में मिर्गी के रोगियों के इंजेक्शन भी मिले। डॉक्टरों ने कहा कि यह इंजेक्शन सामान्य व्यक्ति को भी बेहोश कर सकता है।
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जांच में पता चला कि बालिका गृह में सेक्स वर्करों को भी लाया जाता था। बालिका गृह के फर्श पर एफएसएल को एक कागज का टुकड़ा मिला है। इसे पढ़ने पर सेक्स वर्करों के भी बालिका गृह में आने के सबूत मिले। इस कागज में आबदा हाईस्कूल के पास भी सेवा संकल्प एवं विकास समिति द्वारा आश्रय गृह चलाने की बात भी लिखी है।
मुजफ्फरपुर कांड में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती जा रही है, एक से बढ़कर एक रसूखदारों के नाम सामने आ रहे हैं। अब इनमें और भी कई बड़े नाम शामिल हो सकते हैं, क्योंकि बिहार सरकार के इस पूरे कांड की अब सीबीआई जांच होगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार पुलिस के मुखिया के एस द्विवेदी, मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव गृह को तत्काल ही इस केस को सीबीआई को सौंपने का आदेश दे दिया था।
लेकिन टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की रिपोर्ट के बाद जो पहली गिरफ्तारी हुई वो थी ब्रजेश ठाकुर की। वही ब्रजेश ठाकुर, जिसके एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति की ओर से बालिका गृह चलाया जा रहा था।
ब्रजेश ठाकुर रहने वाला मुजफ्फरपुर का ही है
ब्रजेश के पिता राधामोहन ठाकुर ने 1982 में मुजफ्फरपुर से एक हिंदी अखबार शुरू किया था। इस अखबार का नाम था प्रात: कमल। राधामोहन ठाकुर की पत्रकारों के बीच अच्छी पहुंच थी। बिहार में छोटे अखबारों को शुरू करने वाले शुरुआती नामों में से एक नाम राधामोहन ठाकुर का भी था। धीरे-धीरे राधामोहन ठाकुर ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर अपने अखबार के लिए सरकारी विज्ञापन लेने शुरू कर दिए।
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इन विज्ञापनों से राधामोहन ठाकुर ने खूब पैसे बनाए और फिर उसे रियल स्टेट में लगा दिया। वो रियल स्टेट का शुरुआती दौर था, तो राधामोहन ठाकुर ने इससे भी खूब पैसे बनाए। जब पिता की मौत हो गई, तो विरासत संभालने का जिम्मा आया ब्रजेश ठाकुर पर। पैसे पहले से ही थे और पिता का रसूख भी था। इसलिए ब्रजेश के हाथ में कमान आते ही उसने रियल स्टेट के कारोबार से एक कदम आगे बढ़कर राजनीति में हाथ आजमाना शुरू कर दिया।
अखबार और बालिका गृह की बिल्डिंग एक ही है
अब ये बात पूरी तरह से साफ हो गई है कि ब्रजेश ठाकुर के बालिका गृह की 44 बच्चियों में से 29 बच्चियों के साथ रेप हुआ है। आठ बच्चियों की मेडिकल रिपोर्ट आनी बाकी है। दो बच्चियों की हालत ऐसी नहीं थी कि उनकी मेडिकल जांच करवाई जा सके। इसलिए उनका मेडिकल बाद में होगा।
इस बालिका गृह में एक बच्ची की हत्या कर शव दफनाने की भी बात सामने आई है। जिसके लिए बालिका गृह की खुदाई की गई है। वही वहां की मिट्टी को जांच के लिए भेजा गया है। डीजीपी के एस द्विवेदी के मुताबिक 2013 से 2015 के बीच इस बालिका गृह से चार बच्चियों के गायब होने की भी पुष्टि हो चुकी है। मामला अब सीबीआई के हाथ में है। जिसके बाद ब्रजेश ठाकुर जैसे और भी सफेदपोशों के नाम सामने आ सकते हैं।
यौन उत्पीड़न का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने उसके एनजीओ को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। ब्रजेश ठाकुर इन दिनों अपने बेटे राहुल राज को राजनीति में उतारने और फिट करने की फिराक में था। पिछले पंचायत चुनाव में राहुल ने भी जिला परिषद सदस्य के लिए पर्चा दाखिल किया लेकिन बुरी तरह मात खा गया।
गौरतलब है कि ब्रजेश ठाकुर का कई बड़े बड़े अधिकारियों एवं नेता से भी करीबी संबंध है। वही उनके कई संबंधी बड़े बड़े मीडिया हाउस से भी जुड़े हुए है। जिसका लाभ ब्रजेश ठाकुर को बालिका गृह कांड में मिल रहा है।