सुधाकर सिंह ने कहा, 2006 में एपीएमसी अधिनियम और मंडी को खत्म करना ऐसा फैसला था जो किसान विरोधी प्रकृति का था। राज्य की महागठबंधन की सरकार को अपने सहयोगियों द्वारा मतदाताओं से किए गए वादों को पूरा करने के लिए काम करना चाहिए।
बिहार के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने हाल ही में तब खूब चर्चाओं में रहे थे जब उन्होंने अपने ही विभाग में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। अब शनिवार को उन्होंने कहा है कि वह राज्य में महागठबंधन सरकार आने के बाद अपने विभाग में भाजपा के एजेंडे को नहीं चलने देंगे। राजद नेता ने यह भी कहा कि जब तक कृषि विपणन समिति (एपीएमसी) अधिनियिम और मंडी व्यवस्था बहाल नहीं हो जाती, तब तक वह चैन से नहीं बैठेंगे। सिंह ने कहा कि 2006 में इन्हें खत्म करने का फैसला किसान विरोधी प्रकृति का था।
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बता दें कि साल 2006 एनडीए का शासन था। तब की नीतीश कुमार सरकार ने मंडी व्यवस्था (कृषि उपज का थोक बाजार) और एपीएमसी अधिनियम को निरस्त कर दिया था। सुधाकर सिंह ने कहा कि महागठबंधन की सरकार आने के बाद राज्य में कृषि मंत्री होने के नाते वह अपने विभाग में भाजपा के एजेंडे को जारी नहीं रहने देंगे। सुधाकर सिंह के पिता जगदानंद सिंह अभी बिहार के राजद अध्यक्ष हैं।
सुधाकर सिंह ने कहा, 2006 में एपीएमसी अधिनियम और मंडी को खत्म करना ऐसा फैसला था जो किसान विरोधी प्रकृति का था। राज्य की महागठबंधन की सरकार को अपने सहयोगियों द्वारा मतदाताओं से किए गए वादों को पूरा करने के लिए काम करना चाहिए।
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राजद नेता हाल ही में तब विवाद खड़ा कर दिया जब उन्होंने बयान दिया था कि उनके विभाग के सभी अधिकारी चोर हैं और इस विभाग के प्रमुख होने के नाते वह चोरों के मुखिया हैं। सुधाकर सिंह, कैमूर जिले के रामगढ़ से पहली बार विधायक बने हैं।
कृषि मंत्री ने आगे कहा कि वह एपीएमसी अधिनियम और मंडी व्यवस्ता की बहाली को राष्ट्रीय मुद्दा बनाएंगे। उन्होंने कहा, मैंने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय रसायन व उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया से मिलने का समय मांगा है ताकि उन्हें देश, खासकर बिहार में इन दोनों कानूनों की बहाली की जरूरत को लेकर अवगत कराया जा सके।