पटना के सचिवालय थाने में दी गई शिकायत पर आठ दिन में कोई एक्शन नहीं। प्राथमिकी तक नहीं दर्ज हुई।
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सचिवालय थाना कर रहा आदेश का इंतजार
‘अमर उजाला’ रिपोर्टर ने 9 जनवरी को कई घंटे इस केस की ताजा स्थिति जानने में लगाए। हकीकत के नाम पर कुछ हासिल नहीं हुआ। सचिवालय थाने में बासा की ओर से दी गई शिकायत की कॉपी पड़ी है, बस। सचिवालय थानाध्यक्ष ने बस यह जानकारी दी- “सनहा लिया गया था। 2005 के नियम के अनुसार ऐसे किसी अधिकारी पर पुलिसिया कार्रवाई तभी हो सकती है, जब उसके सीनियर अधिकारी इसकी अनुशंसा करें। मंतव्य के बगैर कुछ नहीं होगा। शेष जानकारी सचिवालय से लीजिए।” कुछ देर बाद थाने में एएसपी भी पहुंचे। उन्होंने भी कहा कि यह हमारे क्षेत्राधिकार से बाहर है। सचिवालय से अनुशंसा अबतक पुलिस को प्राप्त नहीं है और मुख्यमंत्री ने चूंकि जांच के लिए मुख्य सचिव का नाम कह दिया है तो बाकी अधिकारी इसपर बात ही करने के लिए तैयार नहीं दिखे। शुक्रवार को भी यह प्रयास बेकार गया। बताया जा रहा है कि मुख्य सचिव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ ज्यादातर समाधान यात्रा में रह रहे हैं, इसलिए इस दिशा में कोई प्रगति नहीं है। समाधान यात्रा का 16 फरवरी तक का शिड्यूल है। इस बीच 12 को यात्रा नहीं है, लेकिन उस दिन रविवार है।
पहले वीडियो में केके पाठक क्या कह रहे थे
दो फरवरी को सामने आए वीडियो में जहां-जहां गालियां थीं, उन्हें यहां डाट्स के रूप में लिखा गया है- "...डिप्टी कलेक्टर का मां-बहन एक कर दो। ...बिहार एडमिनिस्ट्रेशन! यहां का लोग आदमी ऐसा है। चेन्नई में आदमी ... बाएं से चलता है, यहां देखे हो किसी को बाएं से चलते? लाल लाइट में हॉर्न बजाते देखे हो चेन्नई में किसी को? यहां ... ट्रैफिक में खड़ा होकर पेंपेंपेंपें हॉर्न बजाएगा! देखे नहीं हो क्या तुमलोग बेली रोड पे? ... लाल लाइट भी है और पेंपें भी करेगा। ... यहां का आदमी आज भी है! यहां डिप्टी कलेक्टर ... का ये हाल है। अब मैं ... की मैं, अरे दो-चार लोग लिखकर तो दो ... डिप्टी कलेक्टर ... इनकी ऐसी-तैसी करता हूं। कल जरा भेजो उसको।"
दूसरे वीडियो में केके पाठक क्या कह रहे थे
चार फरवरी को वायरल हुए वीडियो में पाठक जो कह रहे, उसमें भी गालियों की जगह डाट्स लिखे गए हैं। वह कह रहे- "बस मां-बहन की गाली सुनने के बाद अक्ल आती है। अभी तुम्हारी मैडम को फोन लगाता हूं।" (महिला अधिकारी को काॅल लगाने के लिए कहते हैं)। फिर वीडिया कांफ्रेंसिंग हॉल में ही- "सब … सर। अबे ... यहां सर ही तो हैं, यहां आम आदमी कौन है बिहार में...। कहां मर गया रोहतास?” जवाब मिलने पर- "अरे ये जो को-ऑपरेटिव का बंदर बैठा है, उसे (अस्पष्ट वाक्य)।" फिर वही बुदबुदाते हुए- “...उल्लू के पट्ठे इंजीनियर गधा। कॉल पर- दस हजार लेता है तो दो, कराओ। सब के सब निकम्मे, गधे कहीं के।"