बोधगया सीरियल बम ब्लास्ट में एनआईए को यासीन भटकल के दोस्त आमिर रजा खान की तलाश है।
आमिर भी आईएम के संस्थापकों में से एक है। यासीन भटकल के इस फरार दोस्त के आसपास रहने वाले ग्रामीणों से एनआईए की टीम पूछताछ कर चुकी है।
आमिर रजा खान बोधगया से 16 किलोमीटर दूर मोहनपुर प्रखंड के एरकी पंचायत के महियां गांव का मूल निवासी है। एनआईए को आमिर पर लोकल कनेक्शन के जरिये बम ब्लास्ट में शामिल होने का शक है।
एनआईए के सूत्रों के अनुसार आमिर रजा खान अपने दो अन्य भाइयों के साथ कोलकाता में बस चुका है, जहां उसके दोनों भाई अली रजा खान तथा इमरान रजा खान ठेकेदारी का काम करते हैं।
आमिर रजा खान का सबसे बड़ा भाई आसिफ रजा खान कोलकाता में ही अपराध की दुनिया में एक चर्चित नाम हुआ करता था, जिसे मुंबई पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था।
यहीं से आमिर रजा खान ने अपराध की दुनिया में कदम रखा। उसकी पहली मुलाकात अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में यासीन भटकल से हुई।
इसके बाद ही आईएम ने कोलकाता में बम धमाका किया। एनआईए मानती है कि इस धमाके में आमिर रजा खान की प्रमुख भूमिका रही है।
महियां गांव नक्सल प्रभावित भी है इसी कारण एनआईए बाराचट्टी क्षेत्र से कई संदिग्धों से पूछताछ कर चुकी है साथ ही इसी इलाके के विकास यादव को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।
इसी इलाके के रहने वाले विनोद मिस्त्री से भी तीन बार एनआईए पूछताछ कर चुकी है।
यासीन भटकल पर भी शक
एनआईए के डीआईजी ज्योति नारायण ने बताया कि बोधगया सीरियल बम धमाके में महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं।
बोधगया ब्लास्ट में आईएम के सह संस्थापक यासीन भटकल की संलिप्तता पर उन्होंने कहा कि अभी यह कहना उपयुक्त नहीं होगा क्योंकि इससे जांच प्रभावित होगी।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट तौर पर यासीन के बोधगया ब्लास्ट में हाथ होने से इनकार भी नहीं किया। ज्योति नारायण पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
समझा जाता है कि भटकल की गिरफ्तारी के बाद बोधगया सीरियल बम धमाके का सुराग एनआईए के हाथ लगे हैं।
भटकल की गिरफ्तारी के तत्काल बाद बोधगया धमाके की जांच टीम के इंचार्ज विकास वैभव भी मोतिहारी निकल गए। इसी वजह से एनआईए प्रमुख शरद कुमार के बोधगया भ्रमण के दौरान वह मौजूद नहीं थे।
गौरतलब है कि दिल्ली में गिरफ्तार किए गए इंडियन मुजाहिदीन के तीन आतंकियों ने बोधगया में धमाका करने की साजिश का खुलासा किया था। इसी के बाद आईबी ने अपने इनपुट में बिहार के बोधगया में महाबोधि मंदिर की सुरक्षा बढ़ाने को कहा था।
वाराणसी के नौ स्लीपिंग मॉड्यूल भूमिगत
आतंकी यासीन भटकल की गिरफ्तारी के बाद शहर में आतंकियों को आर्थिक और अन्य प्रकार की मदद मुहैया कराने वाले नौ स्लीपिंग मॉड्यूल भूमिगत हो गए हैं।
शुक्रवार को केंद्रीय इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) समेत दो एजेंसियों से जुड़े अधिकारी स्लीपिंग मॉड्यूल्स की छानबीन करने के लिए दालमंडी और रेवड़ी तालाब इलाके में सक्रिय हो गए हैं। गोपनीय तरीके से लोगों से जानकारियां इकट्ठा की जा रही हैं।
एटीएस की टीम ने दिल्ली, गुजरात और अन्य राज्यों की सूचनाओं के आधार पर शहर के नौ लोगों को स्लीपिंग मॉड्यूल के रूप में चिह्नित किया था। इनमें तीन रेवड़ी तालाब के, तीन दालमंडी, दो आदमपुर और एक जैतपुरा इलाके के हैं।
जयपुर की पुलिस ने चार साल पहले रेवड़ी तालाब के एक स्लीपिंग मॉड्यूल को पकड़ लिया था लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के चलते उसे छोड़कर वापस लौटना पड़ा। बताया गया कि वह आतंकियों का सहयोगी नहीं है।
इसी प्रकार रेवड़ी तालाब इलाके से ही लश्कर-ए-तोयबा से जुड़े दो युवक पकड़े गए थे। दोनों को कोलकाता पुलिस लेकर गई थी।
शुक्रवार को केंद्रीय इंटेलिजेंस ब्यूरो और एनआईए की टीम ने दालमंडी और रेवड़ी तालाब का जायजा लिया। खुफिया सूत्रों के मुताबिक कुछ साल पहले तक आदमपुर इलाके में आतंकी शरण लेते रहे।
इस कारण आदमपुर और जैतपुरा के तीन लोग आतंकियों के सहयोगी के रूप में चिह्नित किए गए थे। वर्ष 2006 में नेवी के भगोड़े आईएसआई एजेंट कुंवर सिंह यादव ने गिरफ्तारी के बाद शहर के स्लीपिंग मॉड्यूल्स के बारे में जानकारी दी थी।
शहर में कई आतंकी वारदातें हुई लेकिन एक भी शरणदाता पकड़ा नहीं गया। अब उन पर शिकंजा कसने के लिए खुफिया अधिकारी गहन छानबीन कर रहे हैं।