बिहार में जातीय आधारित जनगणना को लेकर नीतीश सरकार को विपक्ष का भले ही साथ मिल रहा है, लेकिन सहयोगी दल भाजपा इससे दूरी बनाए हुए है। भाजपा नेता और विधान परिषद के सदस्य संजय पासवान ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कोटा पॉलिटिक्स बताया।
बिहार में जातीय आधार पर जनगणना को लेकर सियासत तेज होती जा रही है। सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट होता दिख रहा है। वहीं, एनडीए सहयोगी दल भाजपा इससे पूरी तरह अलग है। बिहार सरकार में पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के एमएलसी संजय पासवान ने विपक्ष पर रिजर्वेशन की राजनीति करने का आरोप लगाया है। पटना में मंगलवार को उन्होंने कहा कि इस समय गरीबों की जनगणना करने की जरूरत है ना कि जातीय आधार पर जनगणना की।
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उनका यह बयान तब आया है जब जनता दल (यूनाइटेड) के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इसकी मांग को लेकर पार्टी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष ललन सिंह की अगुआई में गृहमंत्री अमित शाह मुलाकात की थी। साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पीएम मोदी से मिलकर जनगणना कराने की अपील करने वाले हैं।
वोट बैंक की राजनीति के लिए जातीय आधारित जनगणना- भाजपा
एक अंग्रेजी मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा नेता संजय पासवान ने कहा कि विपक्ष और समाजवादी दल आरक्षण वाली राजनीति करना चाहते हैं, जबकि भाजपा ने ईडब्ल्यूएस को दस फीसदी कोटा देकर आरक्षण की राजनीति को खत्म किया है, जो लोग जातीय आधारित जनगणना चाह रहे हैं, वे ओबीसी और ईबीसी में अपना वोट बैंक देख रहे हैं।