बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठ रहे सवालों देने के भारतीय जनता पार्टी आज सामने आई। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद संजय जायसवाल ने विपक्ष पर चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनावी हार के बाद कांग्रेस और राहुल गांधी चुनाव प्रक्रिया, ईवीएम और एसआईआर को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। जायसवाल ने दावा किया कि विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें वह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है।
पटना में गुरुवार को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत आयोजित प्रेस वार्ता में संजय जायसवाल ने कहा कि एसआईआर चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी के तहत होने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इसका उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना है, तो विपक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है। प्रेस वार्ता में भाजपा के वरिष्ठ नेता और अरवल विधायक मनोज शर्मा, प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल और अशोक भट्ट भी मौजूद रहे।
बैलेट से चुनाव में कांग्रेस की हार का दिया हवाला
संजय जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है, जबकि विधान परिषद चुनाव में वरीयता क्रम के आधार पर बैलेट पेपर से मतदान होता है। इसके बावजूद 28 सीटों में कांग्रेस को केवल एक सीट मिली। उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां भी कांग्रेस सभी चार सीटें हार गई। जायसवाल ने आरोप लगाया कि चुनाव में लगातार हार के बावजूद कांग्रेस जनता के बीच भ्रम फैलाकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है।
एसआईआर को बताया संवैधानिक प्रक्रिया
भाजपा सांसद ने कहा कि एसआईआर कराने का अधिकार चुनाव आयोग को संविधान के तहत प्राप्त है और यह व्यवस्था वर्ष 1950 से लागू है। उनके मुताबिक, अब तक आठ बार यह प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है, जिनमें सात बार कांग्रेस के शासनकाल में एसआईआर हुआ। उन्होंने दावा किया कि बिहार में पिछले वर्ष एसआईआर के दौरान 47 लाख मतदाताओं के नामों में सुधार किया गया था। इनमें मृत, दूसरे स्थान पर जा चुके और मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टि वाले लोग शामिल थे। जायसवाल ने कहा कि इन सुधारों को लेकर एक साल बाद भी किसी प्रभावित व्यक्ति के सामने आने की जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए भारतीय नागरिक होना, 18 वर्ष की आयु पूरी करना और संबंधित स्थान का निवासी होना जरूरी है। मतदाता सूची में किसी तरह की त्रुटि होने पर संबंधित व्यक्ति नोटिस का जवाब देकर और निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क कर सुधार करा सकता है। जायसवाल ने विपक्ष पर घुसपैठ के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि संविधान के तहत विदेशी नागरिकों को मतदान का अधिकार नहीं है।
बंगाल में फर्जी दस्तावेजों से नाम जुड़वाने का लगाया आरोप
संजय जायसवाल ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए बसाने और मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की गतिविधियां बढ़ी हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों के पास दक्षिण 24 परगना के पते पर बने फर्जी आधार कार्ड मिलने की बात सामने आई है। सांसद जायसवाल ने कहा कि भारत सभी धर्मों के नागरिकों का देश है, लेकिन विदेशी घुसपैठियों को मतदान का अधिकार नहीं दिया जा सकता। उन्होंने एसआईआर को मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने वाली प्रक्रिया बताते हुए कहा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने वालों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
मनोज शर्मा बोले- संवैधानिक प्रक्रियाओं पर भ्रम फैलाना गैर-जिम्मेदाराना
भाजपा के वरिष्ठ नेता और अरवल विधायक मनोज शर्मा ने कहा कि विपक्ष एसआईआर समेत कई मुद्दों पर संवैधानिक संस्थाओं को सवालों के घेरे में लाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने संवैधानिक प्रक्रियाओं के खिलाफ भ्रामक प्रचार को गैर-जिम्मेदाराना बताया। शर्मा ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्वीकार किया है, जिसमें हर नागरिक के मत का समान महत्व है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324 का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी दी गई है। शर्मा ने कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए एसआईआर कराया जा रहा है, ऐसे में विपक्ष को प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय इसमें सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक योग्य नागरिक को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन मतदाता सूची में अपात्र प्रविष्टियों को बनाए रखने का समर्थन नहीं किया जा सकता।