जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से बड़े भाई की भूमिका छीनने के बाद अब भाजपा विधानसभा चुनाव की जंग का मुख्य चेहरा भी बन गई है। साल 2005 से अब तक साथ-साथ लड़े चार चुनावों में यह पहला मौका है, जब भाजपा राजद के खिलाफ जदयू के मुकाबले अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
इस बदलाव को पिछले चुनाव में राजद के खिलाफ जदयू के कमजोर प्रदर्शन के कारण एनडीए की बदली रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पिछले चुनाव में जदयू और राजद 71 सीटों पर आमने-सामने थे। इनमें से राजद को 48 सीटों पर जीत हासिल हुई। जदयू महज 21 सीटों पर ही जीत सकी। दो सीटें अन्य के खाते में गई थी। राजद शेष 73 सीटें भाजपा, हम और वीआईपी के खिलाफ लड़ी थी। इनमें से उसे महज 27 सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी।
एनडीए के रणनीतिकारों का कहना है कि इसी को देखते हुए अबकी राजद के खिलाफ जदयू को छोड़ कर तीन अन्य सहयोगी दल 87 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार स्थिति थोड़ी उलट है। राजद के खिलाफ मुख्य मुकाबले में भाजपा है। भाजपा उसके खिलाफ 62 सीटों पर तो जदयू 56 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इसके अलावा लोजपा (आर) अपने हिस्से की 29 में से 18, हम 6 में से चार और आरएलएम छह में से तीन सीटों पर राजद के खिलाफ मुकाबले में है। खासतौर पर लोजपा (आर) के हाथ ऐसी 13 सीटें लगी हैं, जहां एनडीए कभी चुनाव नहीं जीत पाया है।
पहले चरण में नीतीश पर दारोमदार
पहले चरण की 121 सीटों पर एनडीए को राजद पर बढ़त दिलाने की जिम्मेदारी नीतीश कुमार पर होगी। इस चरण में 36 सीटों पर जदयू का मुकाबला राजद से है। भाजपा 23, लोजपा (आर) 11 और आरएलएम दो सीटों पर राजद के सामने है। इस चरण में जदयू का 12 और भाजपा का 13 सीटों पर कांग्रेस से मुकाबला है। भाजपा, जदयू, लोजपा (आर) क्रमश: 5, 14 और 2 सीटों पर माले के खिलाफ मुकाबले में हैं। इस बार समीकरण अलग है। बीते चुनाव में एनडीए खासतौर पर जदयू को गहरा झटका देने वाले रालोसपा और वर्तमान आरएलएम के साथ ही लोजपा (आर) इस बार एनडीए के साथ है।