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बिहार की राजनीति में फिर छिप गया परिवारवाद का मुद्दा

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बिहार की राजनीति में परिवारवाद से कोई भी दल अछूता नहीं है। पश्चिम चंपारण से भाजपा के डॉ. संजय जायसवाल की पहचान उनके पिता डॉ. मदन जायसवाल से है। मुजफ्फरपुर से भाजपा के अजय निषाद दूसरी पीढ़ी के जनसेवक हैं।
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उनके पिता कैप्टन जयनारायण प्रसाद निषाद सांसद थे। उन्होंने अपनी विरासत पुत्र को सौंप दी है। पूर्णियां से भाजपा के सांसद रहे उदय कुमार सिंह उर्फ  पप्पू सिंह भी दूसरी पीढ़ी के नेता हैं। उनकी मां माधुरी सिंह सांसद रह चुकी हैं। उनके भाई डॉ. एनके सिंह बिहार में सत्तारूढ़ जदयू से दो बार राज्यसभा जा चुके हैं।

दरभंगा से भाजपा के सांसद कीर्ति झा आजाद को भी विरासत में राजनीति मिली है। उनके पिता भागवत झा आजाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और केन्द्र में मंत्री भी रह चुके है। लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान जमुई से सांसद हैं।
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पूर्व उप प्रधानमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता बाबू जगजीवन राम की पुत्री मीरा कुमार पूर्व सांसद हैं। समाजवादी नेता तुलसी दास मेहता के पुत्र आलोक मेहता सांसद रहे हैं।  

पुरानी है वंशज को विरासत सौंपने की परंपरा

बिहार की राजनीति में वंशज को विरासत सौंपने की परंपरा नई नहीं है। इतिहास पर नजर डालें तो बिहार में कांग्रेस के दिग्गज नेता अनुग्रह नारायण सिंह ने राजनीति में परिवारवाद की नींव रखी। सिंह के पुत्र सत्येंद्र नारायण सिंह मुख्यमंत्री बने। उनकी मां और पत्नी भी सांसद बनी।

उनके पुत्र निखिल कुमार सांसद बने। बाद में राज्यपाल पद तक पहुंचे। इस चुनाव में अनुग्रह बाबू की चौथी पीढ़ी चुनावी मैदान में उतरने जा रही है। निखिल कुमार अपने बेटे के लिए एक सीट चाह रहे हैं।

इसी प्रकार कांग्रेस नेता ललित नारायण मिश्र का परिवार भी सियासत में कभी पीछे नहीं रहा। एक भाई जगन्नाथ मिश्र तो मुख्यमंत्री बने ही, दूसरे भाई मृत्युंजय मिश्र भी भाजपा में सक्रिय रहे।

जगन्नाथ मिश्र के पुत्र नीतीश मिश्र बिहार के मंत्री की कुर्सी तक पहुंच चुके हैं। ललित के पुत्र विजय कुमार मिश्र विधान पार्षद हैं और उनके पुत्र ऋ षि मिश्र विधायक हैं।
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चुनावी मैदान में कई युवराज

बिहार के चुनावी मैदान में इस बार कई युवराज खड़े हैं। लालू के दोनों बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी यादव तो पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के बेटे संतोष भी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

रामसुंदर दास के बेटे संजय कुमार एक बार फिर अपना भाग्य आजमाने जा रहे हैं। दारोगा प्रसाद राय के बेटे चंद्रिका राय भी मैदान में दिखेंगे।

सतीश प्रसाद सिंह की बेटी सुचित्रा सिन्हा और लोजपा के रामचंद्र पासवान अपने बेटे को मैदान में उतारने की तैयारी कर चुके हैं। इस बार के चुनाव में सौ से ज्यादा उम्मीदवार ऐसे हैं, जो अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने को मैदान में उतरेंगे।
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