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Bihar: तेज प्रताप यादव पहुंचे ईडी दफ्तर के बाहर; रोहिणी बोलीं- भाजपा को धूल चटाने वाला है तेजस्वी, झुकेगा नहीं

Tue, 30 Jan 2024 03:37 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से 10 घंटे तक और फिर तेजस्वी यादव से ईडी की पूछताछ को लेकर राजद कार्यक्रर्ताओं ने आक्रोश है। पटना में ईडी कार्यालय के बाहर राजद कार्यकर्ताओं और नेताओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। वह लालू-तेजस्वी के समर्थन में नारेबाजी लगा रहे हैं।  
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ईडी दफ्तर के बाहर राजद कार्यकर्ताओं की भीड़। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में पूर्वी डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से पटना में ईडी की पूछताछ जारी है। तेजस्वी यादव 11:30 बजे ईडी दफ्तर पहुंचे थे। तब से उनके पूछताछ जारी है। इधर, ईडी दफ्तर के बाहर राजद समर्थकों की भीड़ उमड़ पड़ी है। राजद विधायक और सांसद भी ईडी दफ्तर के पास मंदिर में बैठे हैं। पूर्व मंत्री और तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेज प्रताप यादव भी वहां पहुंचे। सभी लोग तेजस्वी यादव के निकलने का इंतजार कर रहे हैं। इधर, भीड़ देखकर ईडी दफ्तर के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त बलों की भी तैनाती कर दी है। 

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भाजपा को हार का डर सता रहा है
वहीं राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्या लगातार सोशल मीडिया पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ हमला बोल रही है। रोहिणी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भाजपा चाहे कोई भी चाल चल ले। शेर दिल नेता के बेटा के रहते, बिहार में इनकी दाल नहीं गलने वाली है। तेजस्वी डरने वाला नहीं है बल्कि भाजपा को धूल चटाने वाला है। भाजपा को हार का डर सता रहा है। इसलिए ईडी के बल पर तेजस्वी को डरा रही है। रोहिणी ने आगे लिखा कि पिता लालू प्रसाद की तरह ही इनसे भी ED की दिल्ली और पटना टीम के अधिकारी पूछताछ करेंगे। सूत्रों के अनुसार करीब 60 से अधिक सवालों की लिस्ट पहले से ED ने तैयार कर रखी है।



राजद ने पूछा सवाल- जो काम करे वह क्रेडिट ना ले?
वहीं राजद की ओर से सोशल मीडिया पर एनडीए सरकार और सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोला गया। राजद की ओर से सवाल पूछा गया कि जो काम करे वह क्रेडिट ना ले? जो रोजगार और नौकरियों को देश की राजनीति के केंद्र में लाए वह क्रेडिट ना ले? जो सकारात्मक राजनीति से सबकी उम्मीदों को पूरा करे वह क्रेडिट ना ले? जो युवाओं की आकांक्षाओं को वास्तविकता बनाए वह क्रेडिट ना ले? तो क्रेडिट कौन ले? जो अपने राजनीतिक नाटक से हर दूसरे-तीसरे साल मुख्यमंत्री की शपथ ले? जिसकी राजनीति निराशा, बहानेबाजी और असमर्थता का पर्याय हो? जो स्वयं दिशाहीन, युक्ति-विहीन, अनैतिक, शिथिल, अहंकारी और अकर्मण्य हो?

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