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Bihar Teacher Vacancy : भाकपा विधायक बोले- सीएम ने नियमावली पर हमारी सहमति नहीं ली थी, कांग्रेस ने भी सुना दी

Sat, 15 Apr 2023 07:18 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

बिहार में सातवें चरण की शिक्षक बहाली की जगह शिक्षकों की नियुक्ति की नई नियमावली लाने का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। STET 2019 पास अभ्यर्थी नियमावली को शुरू से धोखाधड़ी बता रहे। नियोजित शिक्षकों ने जातीय जनगणना का व्यापक पैमाने पर बहिष्कार किया है।
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नियोजित शिक्षकों ने विरोध जताया। - फोटो : अमर उजाला
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बिहार में सातवें चरण की शिक्षक बहाली की जगह शिक्षकों की नियुक्ति की नई नियमावली लाने का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। STET 2019 पास अभ्यर्थी नियमावली को शुरू से धोखाधड़ी बता रहे। नियोजित शिक्षकों ने जातीय जनगणना का व्यापक पैमाने पर बहिष्कार किया है। AIMIM ने नियोजित शिक्षकों के लिए विभागीय परीक्षा का रास्ता अपनाने की सलाह दी। इतना कुछ होने के बाद अब सरकार के लिए नई मुसीबत सामने आई है, जब सत्तारूढ़ कांग्रेस ने नियमावली पर अपनी सरकार को ही सुना दिया तो सत्ता में शामिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक ने इस नियमावली के लिए उनकी पार्टी से सहमति नहीं लिए जाने की जानकारी दी।

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सातवें चरण की बहाली का अभ्यर्थी इंतजार कर रहे थे
नई शिक्षक नियमावली का विरोध, सरकार में शामिल भाकपा माले ने जताई नाराजगी, अभ्यर्थियों और नियोजित शिक्षकों के साथ की बैठक की। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर से हमलोग महागठबंधन सरकार का समर्थन करते हैं। बिहार सरकार ने नई शिक्षक नियमावली लायी है। मुख्यमंत्री जी ने यह भी कहा कि इस नियमावली में जो परीक्षा का प्रावधान किया गया है, इसको लेकर महागठबंधन की सातों पार्टियां सहमत हैं। इससे हमलोग इत्तेफाक नहीं रखते हैं। हमलोगों से इस संबंध में बात नहीं की गई है। संदीप सौरभ ने कहा कि हमलोगों का मानना है कि सातवें चरण की बहाली का अभ्यर्थी इंतजार कर रहे थे। पिछले 4 साल से अभ्यर्थी इसके लिए टकटकी लगाए हुए थे। इसे पहले की तरह बहाली होने दिया जाए। अगले चरण की बहाली में सरकार परीक्षा ले सकती है। हमलोग महागठबंधन की सभी पार्टियों से इस मुद्दे पर बातचीत करने वाले हैं। इसमें सुधार की मांग हमलोगों ने की है। 

शिक्षक अभ्यर्थियों ने किया बहिष्कार
बता दें कि जातीय जनगणना में प्रगणक की सबसे अहम भूमिका निभाने वालों में सर्वाधिक संख्या शिक्षकों की है और 2006 से अबतक नियोजित किए गए शिक्षकों ने इसके बहिष्कार की घोषणा कर दी है। शिक्षक जातीय जनगणना के विरोध में ऐसा नहीं कर रहे हैं, बल्कि पिछले दिनों घोषित शिक्षकों की नियुक्ति की नई नियमावली के विरोध में आंदोलनकारी कदम उठा रहे हैं।

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