मुजफ्फरपुर स्थित बालिका गृह में हुए यौन उत्पीड़न कांड में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। ताजा खुलासा यह है कि सिविल सर्जन कार्यालय से बालिका गृह की बच्चियों के स्वास्थ्य जांच से संबंधी कोई दस्तावेज नहीं है। जबकि बालक गृह के बच्चों के स्वास्थ्य जांच संबंधी रिपोर्ट मौजूद है।
स्वास्थ्य विभाग की मानें तो बालक और बालिका दोनों गृह में रहने वाले 18 साल से कम के लड़के व लड़कियों के स्वास्थ्य की जांच सप्ताह में दो बार सरकारी डॉक्टरों को करना था। माना जा रहा है कि सीबीआई जांच शुरू होने के बाद बालिका गृह से संबंधित दस्तावेज को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
इधर, सामाजिक सुरक्षा कोषांग विभाग के अधिकारी भी अब तक दावा करते रहे हैं कि सिविल सर्जन से लेकर डॉक्टर तक बालिका गृह में निरीक्षण के साथ ही स्वास्थ्य जांच के लिए जाते थे, लेकिन 2013 से लेकर 2018 तक में बालिका गृह में जांच के लिए गए सरकारी डॉक्टरों के नाम रिकॉर्ड से गायब हैं।
सूत्रों की माने तो सिविल सर्जन से लेकर सरकारी डॉक्टर तक बालिका गृह पहुंचते थे। इसकी पुष्टि निरीक्षण के दौरान लड़कियां भी करती थी। अब मामला उजागर होने के बाद 2013 से 2018 के बीच रहे सिविल सर्जन से लेकर उन डॉक्टरों की परेशानी बढ़ सकती है, जो बालिका गृह जाकर स्वास्थ्य जांच कर रहे थे।
वहीं, दस्तावेजों में डॉक्टरों के निरीक्षण नहीं करने की रिपोर्ट जांच एजेंसी को देने पर भी स्वास्थ्य विभाग पर प्रश्न खड़ा होगा कि आखिर एक ही विभागीय आदेश से बालक गृह की जांच की गई और बालिका गृह की लड़कियों की स्वास्थ्य जांच क्यों नहीं की गई।