एक तरफ बिहार में मिड डे मील खाने से 25 बच्चों की मौत के बाद सरकार पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है अब फंड का इस्तेमाल न करने को लेकर भी वो घेरे में आ गई है।
राज्य सरकार ने इस योजना में सुधार और खाने की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए केंद्र से मिले करीब 462.78 करोड़ रुपए पिछले साल केंद्र को लौटा दिए। राज्य सरकार इन रुपयों का इस्तेमाल नहीं कर पाई।
टीओआई की खबर के मुताबिक बिहार सरकार को यह पैसे मिड डे मील की रसोई में सुधार और बर्तनों की खरीद के लिए दिए गए थे। यह पैसे पांच साल तक सरकार के पास रखे रहे और इनका कोई इस्तेमाल नहीं हुआ।
इसी हफ्ते छपरा में कीटनाशक में बना मिड डे मील खाने से 25 बच्चों की मौत हो गई थी और कई बच्चे अब भी बीमार हैं। खाना बनाने में साफ-सफाई न होना भी बच्चों के बीमार होने का कारण बताया जाता रहा है।
2006 में मिला फंड
बिहार सरकार को यह राशि वर्ष 2006-07 और 2009-10 के बीच दी गई थी। साल 2012 तक इस फंड का कोई इस्तेमाल नहीं किया गया। इस फंड की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने फंड वापस करने पर हैरानी भी जताई है और इसे असामान्य बताया है।
सूत्रों के अनुसार ऑडिटर्स ने भी फंड का इस्तेमाल न कर बैंकों में या फिकस्ड डिपॉजिट में रखे रहने के रवैये पर भी आपत्ति जताई थी इसके बाद ही केंद्र को यह राशि लौटाई गई।