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Bihar News: मौत बांट रहे औरंगाबाद के प्राइवेट हॉस्पिटल्स, एक माह में तीन की डेथ, जनता में भारी आक्रोश

Thu, 21 Sep 2023 06:02 PM IST
लोकेंद्र सिंह चंपावत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद

सार

बिहार के औरंगाबाद में लगातार प्राइवेट अस्पतालों की लापरवाही सामने आ रही है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले एक महीने में तीन अस्पतालों में तीन लोगों की मौते हो चुकी है।
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एक माह में तीन अस्पतालों में तीन डेथ, जनता में रोष - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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औरंगाबाद जिले में प्राइवेट हॉस्पिटल्स कुकुरमुत्ते की तरह उगे हुए है। इनमें वैध-अवैध दोनों तरह के अस्पताल शामिल है। खास बात यह है कि दोनों ही मौत बांट रहे है। हर माह औसत एक मौत होती है। लंबे समय की बात छोड़कर यदि सिर्फ तीन माह की ही बात करे तो इन अस्पतालों में तीन मौतें हो चुकी है। हर महीने औसत एक मौत होती है। मौत बांटने वाले सभी अस्पतालों पर गलत इलाज करने का आरोप है।

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समझिए सिलसिलेवार मौत के घटनाक्रम को
1. पहला मामला औरंगाबाद शहर के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बी किशोर के प्राइवेट हॉस्पिटल का है। नवजात शिशु की मौत का मामला। डॉ. किशोर के अस्पताल में कुटुम्बा थाना के जमुआ गांव निवासी अनीश कुमार सिंह के नवजात शिशु की मौत का है। नवजात शिशु को एनआइसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी मौत हो गई थी। यहां भी आरोप गलत इलाज करने का ही है। उस वक्त परिजनों ने हंगामा भी किया था। पुलिस के आने पर मामला शांत हुआ था। राजद के नेता पर मैनेज कराने का आरोप है कि मामले को शांत या मैनेज कराने में सत्ताधारी दल राजद के जिला प्रवक्ता डॉ. रमेश यादव ने अहम भूमिका निभाई थी। क्योंकि हॉस्पिटल के संचालक डॉ. किशोर उनके स्वजातीय है। 

2. फीवर पीड़ित युवक को डॉक्टर ने चढ़ाई स्लाइन से मौत हो गई जो दूसरा मामला है। शहर के सत्येंद्रनगर स्थित डॉ. संतोष कुमार के हॉस्पिटल का हैं और यह मामला राजद के जिला प्रवक्ता डॉ. रमेश यादव से ही जुड़ा है। डॉ. यादव का भतीजा मनीष कुमार (22) बाइक से अपनी मां को साथ लेकर खुद अपना ही फीवर का इलाज कराने आया था। जहां स्लाइन चढ़ाने के बाद उसकी मौत हो गई। मौत के बाद चिकित्सक फरार हो गया। वहीं, मामले में राजद के जिला प्रवक्ता डॉ. रमेश यादव के दो चेहरे सामने आए है। पहला चेहरा डॉ. बी किशोर के अस्पताल में नवजात की मौत पर मामले को मैनेज कराने वाला है। वहीं, दूसरा चेहरा आंदोलन वाला है। चूंकि उनके भतीजे की मौत हुई है। इस कारण राजद नेता आंदोलन पर है। शायद मामले में उनका सगा नही होता तो शायद राजद नेता आंदोलन करने के बजाय यहां भी मैनेज कराने का काम करते। फिलहाल डॉ. संतोष का अस्पताल बंद है और वह फरार है। इधर राजद नेता डॉक्टर की गिरफ्तारी और चिकित्सक का निबंधन रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलनरत है और घटना के विरोध कैंडल मार्च तक निकाला जा चुका है। 
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3. इलाज कराने आई महिला को चढ़ाया स्लाईन चढ़ाया। जिससे हालत बिगड़ी तो महिला की मौत हो गई, जो तीसरा मामला है। ओबरा के अरविंद हॉस्पिटल में अदमा गांव की सीता देवी की मौत का है। महिला इलाज कराने आई थी। अस्पताल में स्लाइन चढ़ाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। इसके बाद इलाज करने वाले डॉक्टर ने एंबुलेंस से दाउदनगर स्थित अपने ही अस्पताल में भेज दिया, जहां उसकी मौत हो गई। मौत के बाद  दाउदनगर के अरविंद हॉस्पिटल ने मृतका का शव उसके गांव भेज दिया। 

हंगामा होने पर प्राथमिकी हुई दर्ज
गांव में शव आते ही परिजनों ने ओबरा आकर अरविंद हॉस्पिटल पर प्रदर्शन भी किया। गलत इलाज करने का आरोप लगाया। प्रदर्शन की सूचना पर पुलिस ने आकर हंगामें को शांत करवाया। अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। साथ ही अस्पताल की ओर से भी प्रदर्शन करने वालों पर एक एफआईआर दर्ज कर ली गई है। ताजातरीन ये तीन मामले प्राइवेट अस्पतालों की कारगुजारियों की बानगी मात्र है। पूर्व में भी ऐसे अस्पताल थोक के भाव में मौत बांट चुके है। लेकिन आजतक इन पर कोई कार्रवाई नही हुई है। नतीजतन ये अस्पताल आज भी सीना तान कर खड़े है। 

सिविल सर्जन ने तीन सदस्यीय जांच कमिटी गठित की। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी। पूरे मामले में पूछे जाने पर औरंगाबाद के सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रविभूषण श्रीवास्तव ने कहा कि दो निजी अस्पतालों में दो की मौत की शिकायत उनके संज्ञान में आई है। दोनों ही मामलों में चिकित्सक पर गलत इलाज करने का आरोप है। मामले की जांच के लिए उनके नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमिटी गठित की गई है। जांच कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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