यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब दिग्गज नेता रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी में वर्चस्व को लेकर चिराग की अपने चाचा पशुपति पारस से सियासी जंग चल रही है। साथ ही पारस का समर्थन करने के चलते भाजपा के साथ भी चिराग की खटपट की शुरुआत हुई है।
चिराग शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अपने चाचा के खिलाफ याचिका खारिज होने के बाद हाजीपुर से आशीर्वाद यात्रा बीच में ही छोड़कर राष्ट्रीय राजधानी आ गए थे। शनिवार शाम को रजक ने उनसे मुलाकात की। मुलाकात एक घंटा चली।
राजद सूत्रों का कहना है कि चिराग को एक बार फिर से विपक्षी गठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है। चिराग ने इस प्रस्ताव पर विमर्श करने का आश्वासन दिया है।
राजद सूत्रों का कहना है कि लोजपा में जारी विरासत की जंग मामले में बिहार के अंदर पार्टी मतदाताओं की सहानुभूति चिराग के साथ है। इसके चलते उनके विपक्षी गठबंधन से जुड़ने पर लाभ होगा।
इस कारण लालू प्रसाद के पुत्र और फिलहाल अनौपचारिक तौर पर राजद की कमान संभाल रहे तेजस्वी यादव भी सार्वजनिक तौर पर चिराग को बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के खिलाफ अपने साथ खड़े होने का न्योता दे चुके हैं।
भाजपा से मोहभंग हो चुका है लोजपा सांसद का
लोजपा सांसद चिराग को उम्मीद थी कि पार्टी में वर्चस्व की जंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनका साथ देंगे और उनके चाचा पारस को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन बिहार के सीएम नीतीश कुमार के दबाव में पारस को टीम मोदी में बतौर कैबिनेट मंत्री शामिल किया गया।
इसके बाद चिराग का भाजपा से मोहभंग हो चुका है। इससे पहले बिहार विधानसभा चुनाव में भी चिराग ने भाजपा से अलग अकेले लड़ने की राह पकड़ी थी।