पटना में जिला समन्वय समिति की बैठक में नहीं आने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है। जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने इन अधिकारियों का वेतन रोक दिया और इनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया। पटना के डीपीआरओ लोकश कुमार झा के अनुसार, जिला समन्वय समिति की बैठक में तीन अंचल अधिकारी, पांच बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, दो भूमि सुधार उप समाहर्ता तथा पांच जिला-स्तरीय पदाधिकारी अनुपस्थित थे। जिलाधिकारी ने इन सभी पदाधिकारियों का आज का वेतन अगले आदेश तक अवरुद्ध करते हुए सभी से स्पष्टीकरण किया है। उन्होंने कहा कि यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके विरुद्ध विभागीय तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लंबित परिवादों की कुल संख्या 2,327
जिलाधिकारी द्वारा लोक शिकायत निवारण एवं आरटीपीएस से संबंधित मामलों की समीक्षा की गयी। सभी लोक प्राधिकारों एवं अधिकारियों को आवेदनों का त्वरित निष्पादन करने का निदेश दिया गया। समीक्षा में पाया गया कि जिला में लोक शिकायत निवारण में विगत एक सप्ताह में 262 मामलों को निष्पादित किया गया है जबकि 233 परिवाद प्राप्त हुआ था। विगत 30 कार्य दिवस से अधिक लंबित मामलों की संख्या 469; विगत 45 कार्य दिवस से अधिक लंबित मामलों की संख्या 253 तथा विगत 60 कार्य दिवस से अधिक लंबित मामलों की संख्या 01 है। लंबित परिवादों की कुल संख्या 2,327 है। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को इन लंबित मामलों को निर्धारित समय सीमा के अंदर निष्पादन करने का निदेश दिया।
अतिक्रमण वाद के 424 मामले लंबित
बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम अन्तर्गत अतिक्रमण वाद के 424 मामले निष्पादन हेतु लंबित हैं। इसमे श्रेणी-सी में अतिक्रमण के 88 मामलों में अंचल अधिकारियों से प्रतिवेदन प्राप्त होना शेष है। इसमें दो अंकों में लंबित अंचलों में दानापुर में 21, बिहटा में 21, पुनपुन में 19, तथा धनरूआ में 11 मामले निष्पादन हेतु लंबित है। बाढ़, दुल्हिनबाजार, पालीगंज, मोकामा, पंडारक, बख्तियारपुर, बेलछी, घोसवरी, मनेर, अथमलगोला, खुशरूपुर, दनियावां तथा फतुहा अंचलों में यह शून्य है। बाकी अंचलों में लंबित मामलों की संख्या सिंगल डिजिट में है। जिलाधिकारी द्वारा विशेष रूचि लेकर इसका निष्पादन करने का निदेश दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि श्रेणी-सी के तहत सभी अंचलों में अतिक्रमण के शून्य मामले लंबित रहना चाहिए।
सफल क्रियान्वयन सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता
ज़िलाधिकारी ने कहा कि बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 तथा बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, 2011 का सफल क्रियान्वयन सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। सभी पदाधिकारी इसके लिए सजग, तत्पर एवं प्रतिबद्ध रहें। योजनाओं के क्रियान्वयन में शिथिलता, अनियमितता एवं लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि आरटीपीएस के मामलों में जिन-जिन अंचलों/प्रखंडों में शिथिलता बरती जा रही है। वहां संबंधित अपीलीय प्राधिकार अनुमंडल पदाधिकारी समीक्षा करते हुए मामलों की स्वतः सुनवाई करेंगे। लापरवाही अधिकारियों के विरूद्ध नियमानुसार दंड अध्यारोपित करेंगे। यही नियम लोक शिकायत निवारण के मामलों में भी लागू किया जाएगा।