अक्टूबर-नवंबर 2020 के दौरान तीन चरणों में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का बुरा हाल रहा। चुनाव के आंकड़ों में पिछड़ने के बाद अब जदयू बड़े स्तर पर रणनीति तैयार कर रही है, ताकि पिछली बार हुई चूक को सुधारा जा सके। दरअसल, पार्टी ने अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए मासिक मुखपत्र ‘जदयू संधान’ जारी किया है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मानना है कि उनके कामों की जानकारी जनता के बीच नहीं पहुंच पाई, इसलिए पार्टी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन न कर सकी। ऐसे में अब पार्टी ने अपना मुखपत्र जारी किया है। हालांकि, पहले नीतीश यही कहते हुए सुने जाते थे कि वह बोलने से अधिक काम करने में विश्वास रखते हैं, लेकिन चुनाव के नतीजों के बाद वह कई मौकों पर कह चुके हैं कि पार्टी के कार्यों की जानकारी जनता के बीच नहीं पहुंच पाई। इससे हुई क्षति की भरपाई अब पार्टी ‘जेडीयू संधान’ नाम के मासिक मुखपत्र से करने की तैयारी में है। यह मुखपत्र हिंदी और अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित होगा। आने वाले दिनों में इसे मैथिली, अंगिका, भोजपुरी और उर्दू में भी प्रकाशित किया जाएगा।
इस मुखपत्र के हिंदी संस्करण के संपादक डॉ. कुमार वरुण ने बताया कि इस मुखपत्र को पार्टी की विचारधारा को आमजन तक पहुंचाने के लिए निकाला गया है। पार्टी ने दूरदृष्टि रखते हुए यह मुखपत्र जारी किया। मुखपत्र में मौजूद लोक संवाद कोना के जरिये पार्टी और सरकार के बारे में आम लोगों की राय को प्रमुखता दी जाएगी। इसमें संगठन की आने वाली नीतियों के साथ ही बीते समय में क्या खोया-क्या पाया, इसका दस्तावेज भी होगा।
मुखपत्र के अंग्रेजी संस्करण के संपादक कुमार बिमलेन्दु ने कह कि आने वाले दिनों में पार्टी का विस्तार होगा। ऐसे में इस मुखपत्र की जरूरत भी बढ़ेगी। नागालैंड जैसे नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में भी पार्टी के विस्तार के लिए यह मुखपत्र काम आएगा। उन्होंने कहा, अगर आपने कोई काम किया है तो वह लोगों को पता होना चाहिए। यह मुखपत्र महाराष्ट्र में शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ की तरह ही पार्टी का स्टैंड रखेगा, लेकिन इसमें ‘सामना’ की तरह सनसनीखेज बातें नहीं होंगी। ‘जेडीयू संधान’ समाजवादी और धर्म-निरपेक्ष होगा।