मुज़फ़्फ़रपुर जिले के सुप्रसिद्ध बाबा गरीबनाथ मंदिर को नैवेद्यम प्रसाद की बिक्री के लिए नगर निगम के द्वारा दी गई जमीन पर अब सोगरा वक्फ ने दावा ठोक दिया है। इस मामले में बिहार स्टेट सुन्नी वक्फ ट्रिब्यूनल ने मामले को लेकर मुजफ्फरपुर के प्रशासन को जवाब दाखिल करने को कहा है। इस मामले में वक्फ ट्रिब्यूनल के सामने जिले का पक्ष रखने वाले एक अधिवक्ता अंजुम अख्तर ने डीएम को पत्र भेजा है, जिसका जवाब देने के लिए मंजर हसन बनाम बिहार राज्य और अन्य के मामले की सुनवाई 28 जनवरी 2025 को बिहार राज्य वक्फ न्यायाधिकरण पटना में होगी।
जानिए क्या है मामला
दरअसल दो पूर्व वर्ष 2022 में मुजफ्फरपुर नगर निगम के तत्कालीन नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय के द्वारा यह मंदिर के आगे की जमीन गरीब नाथ मंदिर न्यास समिति को नैवेद्यम प्रसाद का वितरण करने के उद्देश्य से तभी तात्कालिक उपयोग हेतु दिया गया था। इस पर बक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्ति का मंदिर ट्रस्ट के उपयोग करने के दिए गए आदेश पर आपत्ति दर्ज करते हुए मामले को बिहार बक्फ ट्रिब्यूनल पटना में दर्ज किया गया, जिसकी सुनवाई 13 दिसंबर 24 को की गई।अब अगली निर्धारित तिथि 28 जनवरी को एसडीओ पूर्वी नगर निगम एवं मुशहरी अंचल से समन्वय बनाकर के अब विधिक पक्ष को अंचलाधिकारी मुशहरी प्रखंड के अंचल अधिकारी के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे।इसको वर्ष 2022 में तत्कालीन नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय ने 270 वर्गफीट (18x15) जमीन श्रीगरीबनाथ मंदिर न्यास समिति को प्रयोग करने के लिए दी थी। न्यास समिति के आग्रह और डीएम के निर्देश पर उन्होंने यह अनुमति दी थी और इसके चूंकि अनुमंडल पदाधिकारी पूर्वी अभी गरीब नाथ मंदिर न्यास समिति के उपाध्यक्ष हैं।और इसलिए इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी पूर्वी अमित कुमार ने बताया कि यह 2022 का मामला है जिसे अस्थायी रूप से मंदिर को दिया गया था अंचलाधिकारी मुसहरी को यह कहा गया है कि संबंधित कागजात लेकर जबाब दाखिल करें।
मंदिर से इस जमीन का कोई जुड़ाव नहीं
स्थानीय वार्ड पार्षद केपी पप्पू का इस संबंध में कहना है कि इस जमीन का बाबा गरीब नाथ मंदिर से कोई भी लेना देना नही है। सावन के महीने में भीड़ को देखते हुए इसको अस्थायी रूप से इस जगह को नैवेद्यम प्रसाद बांटने के लिये दिया गया था और आज के समय की तारीख में यहां कुछ नही है और इस समाज मे हिन्दू मुस्लिम दोनो एक साथ रहते हैं और इस मामले का मंदिर से नहीं जुड़ा हुआ नहीं है।
पूर्व में किसी के द्वारा दान में दी गई थी
जमीन से जुड़े स्थानीय इम्तेयाज आलम ने बताया कि यह कोई नया मामला नही है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज बताते थे कि यह 200 साल से हमलोग यहां रह रहे हैं और वक्त के साथ कई चीजें जमींदोज हो गई। पहले यहाँ सामाजिक कार्य होते थे और यहां पर सभी हिन्दू भाई और मुस्लिम भाई कई बार बैठकर बातकर कोई समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन मामला कोर्ट में चला गया। उन्होंने कहा कि दोनो पक्षों ने कोर्ट में अपनी बात रखी है। जो भी फैसला आएगा मान्य होगा उसको हमलोग मानेंगे।